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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का राज्यपाल सम्मेलन-2021 में समापन सत्र में उद्बोधन

राष्ट्रपति भवन : 11.11.2021

इस राज्यपाल सम्मेलन में अपना योगदान देने के लिए, मैं आप सभी राज्यपालों, उप-राज्यपालों और प्रशासकों की सराहना करता हूं। मैं आशा करता हूं कि यह विचार-विमर्श आप सभी के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

राज्यपाल सम्मेलन को आयोजित करने के लिए मैं गृह मंत्री और उनके मंत्रालय के सभी अधिकारियों की विशेष रूप से प्रशंसा करना चाहूंगा जिन्होंने बड़े परिश्रम से इस सम्मेलन को सफल बनाया। साथ ही राष्ट्रपति भवन के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मैं सराहना करता हूं।

आज यहां दोनों सत्रों में व्यापक चर्चा हुई। कुछ राज्यपालों ने अपने राज्य में अपनाई गई best practices के बारे में विस्तार से अवगत भी कराया। मैं यह चाहूंगा कि यहां पर उपस्थित सभी राज्यपाल और उप-राज्यपाल उत्तम और अनुकरणीय प्रयोगों का समुचित उपयोग करें। इस मंच पर पहले हमने cooperative federalism और competitive federalism की भी चर्चा की है। सहयोग और प्रतिस्पर्धा का सामाजिक जीवन में प्रमुख स्थान होता है। इससे जीवन को गति मिलती है। पर यह युग collaboration का है। जिन best practices की चर्चा हुई है, उन्हें अन्य राज्यों में अपनाया जा सकता है। अगर किसी राज्य के नए प्रयोग से जनता लाभान्वित होती है, तो उस प्रयोग को दूसरे राज्य में भी अपनाया जाना चाहिए। आप सभी अपने गृह-राज्य से दूर किसी दूसरे राज्य में संवैधानिक दायित्व निभा रहे हैं। आप सभी राष्ट्र के प्रति सेवा भाव और निष्ठा से अपने-अपने राज्यों में कार्य कर रहे हैं। यही भारत के federalism और राष्ट्रीय एकता का उदाहरण है।

आज हम सब इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर हैं। इसमें संदेह नहीं है कि हमारा देश समुचित नीति और मार्गदर्शन से विश्व के अग्रणी देशों में अपनी जगह बना रहा है। यह आवश्यक है कि हम सब ऐसे कदम उठाएं जो देश के उत्थान में सहायक सिद्ध हो।

गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और लद्दाख के राज्यपालों द्वारा अलग-अलग महत्वपूर्ण विषयों पर केन्द्रित best practices पर प्रस्तुति करने के लिए मैं उनकी सराहना करता हूं।

शिक्षा के महत्वपूर्ण विषय की तरफ मैं आप सब का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। आज के युवा विद्यार्थी हमारे देश का भविष्य हैं। इसलिए आप सब का यह दायित्व है कि राज्यों के विश्वविद्यालयों के चांसलर के रूप में आप उनका मार्गदर्शन करें।

जब मैं बिहार में राज्यपाल था तब मैं नियमित रूप से 6 महीने के अंतराल पर सभी वाइस चांसलर्स की बैठक आयोजित करता था जिसमें राज्य के शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री भी भाग लेते थे। केंद्र से को-ऑर्डिनेशन के लिए यूजीसी के चेयरमैन को भी हम शामिल करते थे। एक दिन के उस कार्यक्रम में विधिवत प्रत्येक विश्वविद्यालय के हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा हो जाती थी। ऐसी चर्चा हर राज्य में होनी चाहिए।

वाइस चांसलर्स की नियुक्ति के लिए सर्च एंड सेलेक्शन कमिटी के गठन में यह प्रयास होना चाहिए कि उसका अध्यक्ष केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर अथवा किसी प्रमुख शिक्षाविद को बनाया जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफ़ारिशों को लागू करने पर विशेष ज़ोर देना चाहिए। मैं मानता हूं कि इस संदर्भ में आप सबने अपने-अपने राज्यों में वाइस चांसलर्स के साथ बैठक कर ली होगी। यदि ऐसी बैठक नहीं हुई है तो उसका शीघ्र आयोजन करना चाहिए।

आपका प्रोत्साहन राज्य के विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय बनाने में महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगा। मुझे संतोष है कि मेरे सुझाव पर आप में से कुछ राज्यपालों ने ‘यूनिवर्सिटीज़ सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी’ के विषय को गंभीरता से लियाहै।

आज जिन best practices का उल्लेख किया गया है वे सभी अनुकरणीय हैं। इनके अतिरिक्त भी मैं सुझाव के रूप में आप सबके लिए कुछ बातों का उल्लेख करना चाहता हूं। प्रायः देखने में आया है कि आप लोगों में से अधिकतर राज्यपाल अवकाश लेकर अपने गृह राज्य में जाते हैं। पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन के लिए जाना भी चाहिए। लेकिन अपने गृह राज्य में हमारा प्रवास जितना कम से कम हो, इसकी कोशिश हम सबको करनी चाहिए। इसके स्थान पर यदि हम कुछ समय निकालकर अन्य राज्यों के राज भवन अथवा उन राज्यों के ऐतिहासिक स्थानों को देखने हेतु समय निकालें तो वह और भी अधिक उपयोगी हो सकता है। दूसरे राज भवन की अच्छी बातों को हम स्वयं अनुभव करते हुए एक दूसरे से साझा भी कर सकते हैं। बिहार में राज्यपाल के रूप में लगभग 2 वर्ष के अपने कार्यकाल के दौरान तकरीबन 13-14 राज भवनों का मैंने भ्रमण किया था। राज भवनों की उन यात्राओं से मुझे बहुत सी best practices सीखने को मिलीं। ऐसी यात्राओं के दौरान अन्य राज्यपालों के साथ परस्पर संवाद होते हैं और अनेक उपयोगी जानकारियां साझा होती हैं। इस पूरी प्रक्रिया को भी मैं एक best practice मानता हूं।

मैंने आज कुछ best practices और परियोजनाओं का उल्लेख मात्र इसलिए नहीं किया है कि वे सफल रही हैं परन्तु इसलिए भी किया है कि वे सभी आप सबके लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन उपलब्धियों को यहां पर दोहराना अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है। लेकिन हम सबका उद्देश्य है इन सब उपलब्धियों के आगे जाना। यह हर सरकार का धर्म है कि उसके कार्य से अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हों।

आप सभी जानते हैं कि हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। यह महोत्सव एक देशव्यापी अभियान है जो भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक पहचान को परिलक्षित करता है। यह महोत्सव भारत के लोगों को समर्पित है जिन्होंने हमारे देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस महोत्सव के अंतर्गत हमारा प्रमुख लक्ष्य है आत्मनिर्भरता के द्वारा एक उज्ज्वल भारत का निर्माण।

राष्ट्र-निर्माण की इस आकांक्षा को पूरा करने के लिए हम सब का ध्येय होना चाहिए - देश को सशक्त, सुशिक्षित, समृद्ध, स्वच्छ और विकसित बनाना। आप सभी राज्यपालों को इन लक्ष्यों से सम्बन्धित नीतियों को प्रोत्साहन देना चाहिए और राज्य सरकारों का मार्गदर्शन करना चाहिए। इन्हीं स्तम्भों पर हमारे राष्ट्र का विकास निर्भर करता है। यदि हमें आत्मनिर्भर और सशक्त देश बनना है तो हमें अभी से ही सही दिशा में कार्य करने होंगे। ताकि 2047 में जब हम आज़ादी का शताब्दी वर्ष मना रहे हो, तब हमारा देश एक मज़बूत आधारशिला पर स्थित शक्तिशाली देश हो जिसकी कल्पना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी।

हम सभी ने अपने-अपने दायित्वों के समुचित निर्वहन हेतु शपथ ली है। इस संदर्भ में मुझे स्मरण होता है कि शहीदों की स्मृति में, कश्मीर के बारामूला में निर्मित ‘डैगर वॉर मेमोरियल’ में, एक आदर्श वाक्य अंकित है। मात्र 6 शब्दों का वह सरल वाक्य है ‘मेरा हर काम, देश के नाम’। इस छोटे से वाक्य में हम सभी की शपथ का सार-तत्व निहित है।

अंत में, मुझे विश्वास है कि आप सब संविधान की मर्यादा तथा राज भवन की गरिमा को बनाए रखते हुए अपने राज्यों का मार्गदर्शन करते रहेंगे और 2022 में जब यह सम्मेलन आयोजित होगा तब आपके पास सफल प्रयोगों अर्थात best practices की लम्बी सूची होगी जिनसे आपके राज्य लाभान्वित हुए होंगे। मैं आपको और आपके राज्य के सभी निवासियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करता हूं।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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