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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का नर्सिंग कर्मियों के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए जाने के अवसर पर संबोधन

नई दिल्ली : 15.09.2021

आज आप सभी के साथ वर्चुअल माध्यम से जुड़कर फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान करते हुए मुझे बहुत प्रसन्नता हुई है। मैं देश भर से आए सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देता हूं। मैं उन सभी स्‍वास्‍थ्‍य-सेवियों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करता हूं, जिन्हें आज सार्वजनिक स्वास्थ्य,अस्पताल प्रबंधन और हैल्‍थकेयर के क्षेत्र में सुधार लाने के साथ-साथ नर्सिंग शिक्षा को व्‍यवस्‍थित रूप देने की दिशा में उल्‍लेखनीय योगदान करने के लिए पुरस्कार प्राप्‍त हुए हैं।

हमारे देश में प्राचीन काल से ही जरूरतमंदों की सेवा करने की परंपरा रही है। जरूरतमंद तथा अस्वस्थ लोगों को राहत पहुँचाने से बढ़कर सेवा और क्या हो सकती है? हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी जरूरतमंदों की सहायता और सेवा करने पर बल दिया गया है। हमारे ग्रन्थों की यही शिक्षा हमारी नर्सों के असाधारण सेवा-कार्यों में परिलक्षित होती है। इस संदर्भ में मुझे चरक संहिता के एक श्लोक का स्मरण हो रहा है:

नात्मार्थम् नापि कामार्थम्

अथ भूत दयाम् प्रति।

अर्थात् रोगियों की देखभाल का कार्य न तो स्वार्थ के लिए किया जाए, न ही अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए, अपितु सभी प्राणियों के प्रति दया भाव से ही यह पुण्य कार्य किया जाना चाहिए।

कोविड-19 महामारी के दौरान, हमारी नर्सों ने कर्तव्‍य-परायणता की इसी भावना का परिचय दिया है। नर्सों द्वारा प्रदत्‍त अमूल्य योगदान के परिणामस्वरूप ही, हमें महामारी से लड़ने में सहायता मिल सकी। हमारी नर्सों ने अपने सतत प्रयासों से देश की आबादी के एक बड़े हिस्से का टीकाकरण कर पाने की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने में मदद की है। भारत में, एक दिन में1 करोड़ से अधिक लोगों के टीकाकरण की विशिष्‍ट उपलब्‍धि, हमारी नर्सों की कर्तव्‍यनिष्‍ठा और अथक प्रयासों से ही संभव हो पाई है। हम सभी देशवासियों को यह सदैव याद रखना चाहिए कि सेवा-भाव से ओतप्रोत हमारी अनेक नर्सों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना हमारे देश को यह उपलब्धि दिलाई है।

कोविड महामारी के विरुद्ध संघर्ष में हमारी अनेक नर्सों ने अपने प्राण गंवाए हैं। मेरी संवेदनाएं उन सभी नर्सों के परिवारों के साथ हैं। मुझे बताया गया है कि पुरस्कार प्राप्त करने वाले एक हैल्‍थवर्कर ने भी कोविड-19 से पीड़ित रोगियों का उपचार करते हुए अपनी जान गंवा दी। इस बलिदान के लिए, राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा। सेवाओं और बलिदानों का मूल्यांकन किसी प्रकार की आर्थिक सहायता से नहीं किया जा सकता। फिर भी,सरकार ने महामारी के दौरान नर्सों के योगदान को गहराई से समझा है और'प्रधान मंत्री गरीब कल्याण पैकेज’ के अंतर्गत‘कोविड-19 से मुकाबला कर रहे सभी हैल्‍थवर्करों के लिए बीमा योजना'आरंभ की है। इस योजना में सभी हैल्‍थकेयर प्रोवाइडर्स के लिए 50 लाख रुपए के व्यापक व्यक्तिगत दुर्घटना कवर की व्यवस्था की गयी है।

देवियो और सज्जनो,

महात्मा गांधी का मानना ​​​​था कि जाति,पंथ और रंग के आधार पर भेद-भाव किए बिना, मरीजों का इलाज करना, हर नर्स का परम कर्तव्य है। व्यक्तिगत रूप से,गांधीजी ने मनुष्यों और पशुओं के बीच कभी कोई भेद नहीं किया। वे,प्राणिमात्र की सेवा एक समान तत्परता के साथ करने में विश्वास करते थे। गांधीजी का मत था कि जरूरतमंदों और बीमारों की सेवा के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्‍त हो सकता है। सेवा और करुणा की यह सहज भावना हमारी बहनों और बेटियों में प्रचुरता से पाई जाती है। बचपन से ही, हम प्रायः अपनी माताओं और बहनों के निस्वार्थ प्रेम का अनुभव करते रहते हैं और संभवतः वही स्नेह हमारी नर्सों के रूप में हमें प्रत्‍यक्ष दिखाई देता है। इस प्रोफेशन में पुरुष नर्सों की तुलना में महिला नर्सों के उच्च अनुपात से इस बात की भली-भांति पुष्टि हो जाती है। यह प्रसन्नता की बात है कि अब पुरुष भी, मेल नर्स के रूप में मरीजों की सेवा के कार्य में आगे आ रहे हैं। आज47 महिला नर्सों सहित, सभी 51 पुरस्कार विजेताओं की सेवाओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए मुझे संतोष की अनुभूति हो रही है। आपकी करुणा और निस्वार्थ स्नेह में, अनेक लोगों को आशा की किरण दिखाई देती है। फ्लोरेंस नाइटिंगेल की ही तरह,आप में से प्रत्येक नर्स एक ऐसा "ज्‍योति-पुंज" है,जिसके प्रकाश में, रोगियों को अंधेरे से प्रकाश की राह दिखाई देती है और उन्हें निराशा में आशा का संबल मिलता है।

‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेस’ द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस2021’ की विषय-वस्तु 'नर्स - ए वॉयस टु लीड - ए विज़न फॉर फ्यूचर हैल्थकेयर' निर्धारित की गई है। इस विषय-वस्‍तु से,विश्व भर के हैल्‍थकेयर डिलीवरी सिस्‍टम में नर्सों की केंद्रीय भूमिका सभी के सामने स्‍पष्‍ट हो जाती है।यह सच है कि अनेक प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान तथा व्यक्तियों,समुदायों और समाज की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति में, नर्सिंग के प्रोफेशन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रायः लोगों और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच संपर्क की पहली कड़ी नर्सें और मिडवाइव्‍स ही होती हैं। नर्स और मिडवाइफ न केवल स्वास्थ्य संबंधी सतत विकास उद्देश्यों यानि एस.डी.जी. के लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान करती हैं बल्कि शिक्षा,स्त्री-पुरुष समानता और राष्ट्र के आर्थिक विकास की दिशा में भी योगदान करती हैं। वे हैल्‍थकेयर डिलीवरी सिस्‍टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हमारे देश में नर्सें, नवीन और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के लिए स्वयं को तैयार कर रही हैं। अब,नर्सिंग में संलग्न लोग विशिष्ट कौशल और दक्षता विकसित कर सकते हैं। सरकार ने मिडवाइव्‍स का एक नया संवर्ग गठित करने के लिए‘मिडवाइफरी सर्विस इनिशिएटिव’की शुरुआत की है। उन्हें 'नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफ'यानि एन.पी.एम. कहा जाएगा, और वे अपेक्षित ज्ञान और दक्षता से युक्‍त हो सकेंगी। इस सराहनीय पहल की सहायता से समाज के आखरी पायदान की महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि हमारी नर्सों की क्षमताओं को देखते हुए विदेशों में भी उनकी सेवाओं की बहुत मांग है। इसीलिए सरकार ने अन्य देशों में कार्य करने की इच्छुक नर्सों की सुविधा के लिए ब्रिज-कोर्स शुरू किया है।

आज के पुरस्‍कार विजेताओं ने लोगों की सेवा के अनुकरणीय उदाहरण प्रस्‍तुत किए हैं। कभी-कभी तो यातायात की बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भी उन्‍होंने अनेक लोगों तक उपचार की सुविधाएं पहुंचाई हैं। इनमें से कुछ स्‍वास्‍थ्‍य-कर्मियों ने अपने कर्तव्य की सामान्य सीमाओं से बहुत आगे जाकर समाज-कल्याण के कार्य भी किए हैं - जैसे बाल विवाह के विरुद्ध लोगों को शिक्षित करना,प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान करना और आदिवासी समुदाय की मदद करना। इनमें से कुछ नर्सों को उनके ऐसे विशिष्ट कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है।

मैं एक बार पुन: इस अवसर पर राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार के सभी विजेताओं को बधाई देता हूं। मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं और यह आशा करता हूं कि आप सब,पूरी संवेदनशीलता व निष्ठा के साथ पीड़ाग्रस्‍त लोगों की सेवा करते रहेंगे तथा अपने महान प्रोफेशन की प्रतिष्ठा को बढ़ाते रहेंगे।

धन्यवाद,

जय हिन्द!

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