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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के हीरक जयंती वर्ष के समापन से संबन्धित कार्यक्रम में सम्बोधन

लखनऊ : 27.08.2021
भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय उत्तर प्रद

नवनिर्मित डॉक्टर सम्पूर्णानन्द सभागार का लोकार्पण करते हुए, इस आयोजन में ‘अप-सेनियन फ्रैटर्निटी’ के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। विद्यालय की क्षमता दोगुनी किए जाने की परियोजना तथा बालिका छात्रावास के भवन का शिलान्यास करके मुझे बहुत खुशी हुई है। राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान देने वाले डॉक्टर सम्पूर्णानन्द जी की प्रतिमा का अनावरण करके मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूं।

इन सभी कार्यों का श्रेय उत्तर प्रदेश सरकार को जाता है। इसके लिए मैं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ तथा शिक्षा के विकास में सक्रिय उनकी टीम की सराहना करता हूं।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि सैनिक स्कूलों के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गोरखपुर में एक सैनिक स्कूल का शिलान्यास किया है। साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश में 16 नए सैनिक स्कूलों की स्थापना करने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया है। सैनिक स्कूलों से जुड़े लोग यह जानते हैं कि वर्ष 2021-22 के बजट में देश में 100 नए सैनिक स्कूलों की स्थापना प्रस्तावित की गई है। यह जानकारी आज दिखाई गई डॉक्यूमेंटरी फिल्म में भी दी गई है।

देवियो और सज्जनो,

उत्तर प्रदेश का यह सैनिक स्कूल देश में स्थापित प्रथम सैनिक स्कूल है। यहां के अध्यापकों तथा विद्यार्थियों ने श्रेष्ठ प्रदर्शन की परंपरा स्थापित की है तथा अन्य सैनिक स्कूलों के लिए अच्छे प्रतिमान निर्धारित किए हैं। इसके लिए विद्यालय की प्रबंध समिति के सदस्यों, अध्यापकों, पूर्व छात्रों और विशेष रुप से सभी विद्यार्थियों को मैं बधाई देता हूं।

मुझे यह जानकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई है कि देश का यह पहला सैनिक स्कूल, बेटियोंके लिए सैनिक स्कूल में शिक्षा का अवसर प्रदान करने में भी सर्वप्रथम है। इस वर्ष पंद्रह अगस्त को प्रधानमंत्री ने एक महत्त्वपूर्ण घोषणा की जिसके अनुसार देश के सभी सैनिक स्कूलों के दरवाज़े हमारी बेटियों के लिए भी खोले जायेंगे।परन्तु यह विशेष रूप से सराहनीय है कि यू.पी. सैनिक स्कूल ने यह निर्णय आज से तीन वर्ष पहले ही ले लिया था। यह पहला सैनिक स्कूल होगा जहां की बेटियां इस वर्ष एनडीए की परीक्षा में भाग लेंगी। इस तरह अब इस परिसर से वीरों के साथ वीरांगनाएं भी भारत-माता की सेवा के लिए तैयार होकर निकलेंगी।

मुझे इस स्कूल के विशाल परिसर और अच्छी सुविधाओं के विषय में बताया गया है। इससे विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु अच्छा वातावरण उपलब्ध होता है। मुझे यह जानकर विशेष प्रसन्नता हुई है कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने के बाद लगभग एक चौथाई विद्यार्थियों ने देश की रक्षा व देशवासियों की सुरक्षा के लिए सेनाओं में अपनी सेवाएं समर्पित की हैं। मुझे यह जानकर भी प्रसन्नता हुई है कि इस सैनिक स्कूल ने अनेक वरिष्ठ अधिकारी भारतीय सेनाओं को दिये हैं, जिनमें से लगभग 35 अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल और मेजर जनरल के पद पर पहुंच चुके हैं। मुझे बताया गया है कि यहां के एक पूर्व छात्र, कोमोडोर पुष्पेंद्र कुमार गर्ग, खेल के क्षेत्र में देश के सबसे बड़े पुरस्कार ‘खेल-रत्न’ से सम्मानित हो चुके हैं।

मुझे अवगत कराया गया है कि इस स्कूल में शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ, खेल-कूद, व्यायाम, सांस्कृतिक क्रिया कलापों तथा नैतिक व राष्ट्रीय मूल्यों के निर्माण पर ज़ोर दिया जाता है। यहां के विद्यार्थियों को कैडेट्स कहा जाता है और कैडेट्स की तरह अनुशासित रहने की शिक्षा दी जाती है। यह अनुशासन जीवन के सभी क्षेत्रों में सहायक सिद्ध होता है। मुझे बताया गया है कि आपके स्कूल के अनेक पूर्व छात्रों ने सेनाओं के साथ-साथ मेडिकल, इंजीनियरिंग, न्यायपालिका, सिविल और पुलिस सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान दिया है। उनमें से कई पूर्व छात्र आज यहां उपस्थित हैं। वे सभी आपके स्कूल का गौरव तो हैं ही, आप सभी कैडेट्स के लिए आदर्श उदाहरण भी हैं।

जब सैनिक की भावना और अनुशासन के साथ खेल के मैदान में हमारे खिलाड़ी उतरते हैं तो हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद, फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह और नीरज चोपड़ा जैसे इतिहास रचने वाले चरित्र सामने आते हैं। वस्तुतः चरित्र निर्माण ही सैनिक स्कूलों की विशेषता है। चरित्र बल ही देश के गौरव के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देने की भावना का आधार है।

देवियो और सज्जनो,

इस सभागार में उपस्थित अमर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय के आदरणीय पिताजी को मैं पूरे देश की ओर से नमन करता हूं और उनके परिवारजनों का अभिवादन करता हूं। राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा हेतु उनके बलिदान के लिए सभी देशवासी आपके परिवार के सदैव ऋणी रहेंगे।

डॉक्टर सम्पूर्णानन्द जैसे स्वाधीनता सेनानियों और कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय जैसे स्वाधीनता के रक्षकों में एक आदर्श समान रूप से देखा गया है। वह आदर्श है - राष्ट्र-गौरव के लिए सब कुछ समर्पित कर देने की भावना। ‘मेरा हर काम, देश के नाम’ यह आदर्श-वाक्य जम्मू-कश्मीर में बारामूला स्थित ‘डैगर वार मेमोरियल’ में अंकित है जहां विगत 26 जुलाई यानि कारगिल विजय दिवस के दिन मैंने सेना के बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस स्कूल के लिए सबसे अधिक गौरव की बात यह है कि यहां के छात्र रहे कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय ने वीरता और बलिदान की अद्भुत व अमर गाथा लिखी है। सभी सैनिक स्कूलों के विद्यार्थियों में से वे परमवीर चक्र से सम्मानित एकमात्र योद्धा हैं। इसी स्कूल के कैप्टन सुनील चंद्रा ने अपने अदम्य साहस और देशभक्ति से भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया और उन्हे मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। मेजर सलमान अहमद खान, कर्नल के.जे. सिंह, कर्नल सुनील मुंडेजा और मेजर आशुतोष पाण्डेय को उन सबके असाधारण पराक्रम के लिए एक कृतज्ञ राष्ट्र द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। मुझे जानकारी दी गई है कि सैनिक स्कूलों के छात्र रहे शहीदों में देश के लिए सर्वाधिक बलिदान आपके स्कूल के पूर्व छात्रों ने किया है। इस स्कूल से निकले भारत माता के उन अमर सपूतों की शौर्य गाथा स्वर्णाक्षरों में अंकित है। ऐसे स्कूल की पवित्र भूमि पर आकर मुझे गौरव की अनुभूति हो रही है।

प्यारे विद्यार्थियो,

सन 1920 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों को ऐसे शिक्षण-संस्थानों का बहिष्कार करने के लिए कहा जो ब्रिटिश हुकूमत से आर्थिक अनुदान लेते थे। गांधीजी के आह्वान पर अनेक विद्यार्थियों ने अपने स्कूल और कॉलेज छोड़ दिए। ऐसे राष्ट्र-प्रेमी विद्यार्थियों की शिक्षा को जारी रखने के लिए गांधीजी ने पूर्णतया भारतीय समाज के सहयोग से बने शिक्षण-संस्थानों की स्थापना की पहल की। परिणाम-स्वरूप काशी विद्यापीठ की स्थापना की गई जिसका उद्घाटन स्वयं गांधीजी ने किया था। आपके स्कूल के संस्थापक डॉक्टर सम्पूर्णानन्द उस समय काशी विद्यापीठ के सर्वप्रथम अध्यापकों में से एक थे और उन्होंने विद्यापीठ के कुलाधिपति की ज़िम्मेदारी भी निभाई थी। काशी विद्यापीठ शिक्षा का केंद्र होने के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन का भी एक प्रमुख केंद्र था।

जब भारत स्वाधीन हुआ तो डॉक्टर सम्पूर्णानन्द जैसे स्वाधीनता सेनानियों ने ऐसी पीढ़ियों को तैयार करने के विषय में सोचा जो लंबे संघर्ष के बाद हासिल की गई अमूल्य स्वाधीनता की रक्षा कर सकें और एक अच्छे समाज का निर्माण करें। देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लोगों की सेनाओं में उपस्थिति बढ़ाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में डॉक्टर सम्पूर्णानन्द ने इस विद्यालय की स्थापना कराई।

प्रखर विद्वान और शिक्षाविद डॉक्टर सम्पूर्णानन्द ने शिक्षा के उद्देश्य पर अपने विचारों को बहुत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया है। उन्होंने विद्यार्थियों और अध्यापकों के कर्तव्यों को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि जहां ज्ञान होता है, वहां शक्ति होती है। उन्होंने योगाभ्यास के महत्व पर भी ज़ोर दिया है। उनके विचार में विद्यार्थियों के मस्तिष्क में जिज्ञासा होनी चाहिए और हृदय में विनम्रता होनी चाहिए।

मुझे विश्वास है कि ऐसे ही आदर्शों को ध्यान में रखते हुए, आप सभी विद्यार्थी और अध्यापक-गण, इस सैनिक स्कूल की प्रतिष्ठा को और अधिक बढ़ाएंगे तथा राष्ट्र-सेवा के गौरवशाली अध्याय लिखेंगे।

देवियो और सज्जनो,

मैं राष्ट्रपति होने के साथ-साथ देश का एक संवेदनशील नागरिक भी हूँ। मेरी यात्रा के दौरान यातायात पर नियंत्रण के कारण आम जनता को जो असुविधा होती है उसके विषय में मेरे कुछ सुझाव है। पहली बात तो यह है कि कार्यक्रम के नियत समय से बहुत पहले ट्रैफिक पर रोक न लगाई जाए। दूसरी बात यह है कि एमरजेंसी वाहनों जैसे एम्बुलेंस आदि के बिना रुकावट निकलने के लिए कोई समाधान सोचें और उस पर कार्य करें। यदि आवश्यकता हो तो मेरे कार-केड को रोक कर भी ऐसे वाहनों को निकलने दें। लेकिन यह जिम्मेदारी निभाने में वाहन चालकों और नागरिकों को ट्रैफिक-नियमों का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करना होगा।

मैं एक बार फिर आप सबको आपके स्कूल के हीरक जयंती वर्ष के सम्पन्न होने की बधाई देता हूं और आप सबके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता हूं।

धन्यवाद,

जय हिन्द!

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