• Skip to Main Content /
  • Screen Reader Access

Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सम्बोधन

गांधीनगर : 23.02.2021
भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के दी

आज के दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों तथा पदक विजेताओं को मैं बधाई देता हूं। आप सभी विद्यार्थियों की इस उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी शिक्षक,परिवार-जन और अभिभावक भी बधाई के पात्र हैं।

भारत के पश्चिमी भाग पर स्थित यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही सभ्यता और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। हड़प्पा-कालीन सभ्यता से जुड़े लोथल और धौलावीरा बन्दरगाह,जूनागढ़ के मौर्य-कालीन शिलालेख,मोढेरा का सूर्य मंदिर,सूरत और मांडवी जैसे व्यापार केंद्र,गुजरात की समृद्ध संस्कृति के साक्षी रहे हैं। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में आज से लगभग 1500वर्ष पूर्व स्थापित वल्लभी विश्वविद्यालय की ख्याति,तक्षशिला,नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों की तरह अनेक देशों के विद्यार्थियों को आकर्षित करती थी। आधुनिक युग में वैदिक मान्यताओं को फिर से स्थापित करने तथा उन्हें पश्चिमी ज्ञान की परंपरा से जोड़ने का क्रांतिकारी कार्य सम्पन्न करने वाले महर्षि दयानन्द सरस्वती का जन्म गुजरात की पावन धरती पर ही हुआ था। राजनीति को राष्ट्र नीति के उच्च स्तर पर ले जाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी औरलौह पुरुषसरदार वल्लभभाई पटेल की जन्म-स्थली भी गुजरात की यही धरती है। इस धरती ने दो ख्याति प्राप्त व लोकप्रिय प्रधानमंत्रीमोरारजी देसाई व नरेन्द्र मोदी – देश को दिए हैं। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे इन दोनों प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अवसर मिला है। आज के दिन इन राष्ट्र-निर्माताओं का उल्लेख करने का उद्देश्य यह है कि आप सभी विद्यार्थी-गण उनके आदर्शों से प्रेरणा लें तथा अपने निजी जीवन में आगे बढ़ने के साथ-साथ,समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी अपना योगदान करते रहें।

आप सब जानते हैं कि सन 2009 में इसविश्वविद्यालय सहित12 नए केन्द्रीय विश्वविद्यालय विभिन्न राज्यों में स्थापित किए गए और तीन राज्यों में पहले से स्थापित राज्य विश्वविद्यालयों को केन्द्रीय विश्वविद्यालयों का दर्जा दिया गया। ऐसे विश्वविद्यालय हमारे देश की विविधता में एकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित परीक्षा द्वारा विद्यार्थियों के प्रवेश की व्यवस्था के आधार पर इस विश्व विद्यालय में भारत के लगभग30राज्यों के होनहार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मुझे बताया गया है कि यहां गुजरात के विद्यार्थियों की संख्या लगभग 15 प्रतिशत ही है जबकि बिहार,उत्तर प्रदेश,ओडिशा,असम,पश्चिम बंगाल तथा तेलंगाना सहित अन्य राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों के विद्यार्थियों की संख्या लगभग 85 प्रतिशत है। इस प्रकार,आपका यह परिसर एक मिनी-इंडिया जैसा है तथा राष्ट्रीय एकता की हमारी भावना को शक्ति प्रदान कर रहा है।

21वीं सदी में स्थापित इस विश्वविद्यालय से यह अपेक्षा की जाती है कि यहां के विद्यार्थी और प्राध्यापक इस सदी की जरूरतों को पूरा करने और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम सिद्ध होंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सब इन अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

देवियो और सज्जनो,

आधुनिक युग की सोच के अनुरूप यह विश्वविद्यालय महिलाओं के सशक्तीकरण का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों में लगभग 55 प्रतिशत संख्या बेटियों की है। यह भी सुखद संयोग है कि आज के कुल 21 पदक विजेताओं में भी 13 बेटियां हैं। यह आपके विश्व-विद्यालय की बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसमें हमारे समाज में हो रहे परिवर्तन की झलक एवं नए भारत की तस्वीर दिखाई देती है। इसी महीने 7 फरवरी को मैंने बेंगलुरु में स्थित राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइन्सेज के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित किया था। आप सब भी यह जानकर आनंदित होंगे कि वहां 111 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 87,यानि लगभग 80 प्रतिशत बेटियां थीं। मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता होती है कि हमारी बेटियां अनेक क्षेत्रों में नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। आपके इस नए विश्वविद्यालय के लिए यह विशेष गर्व की बात है कि यहां की एक बेटी को हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में अध्ययन करने के लिए पोस्ट-डॉक्टोरल फ़ेलोशिप प्रदान की गयी है।

आप सबके साथ यह जानकारी साझा करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है कि इस विश्वविद्यालय के भवन तथा स्थायी परिसर के निर्माण हेतु केंद्र सरकार द्वारा लगभग 743 करोड़ रुपए की राशि अनुमोदित कर दी गई है। योजना के अनुसार,भविष्य में यह विश्वविद्यालय वडोदरा स्थित परिसर से संचालित होगा। परंतु किसी भी विश्वविद्यालय की असली पहचान उसके भवन तथा परिसर से नहीं बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा और शिक्षकों के समर्पण से होती है। आप सबके आचरण और उपलब्धियों के आधार पर ही गुजरातकेन्द्रीयविश्वविद्यालय की छवि निर्मित होगी। मुझे विश्वास है कि आप सब अपने प्रयासों द्वारा अपने इस नए विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठोस आधार प्रदान करते हुए नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हमारे देश कोनॉलेज सुपर पावरबनाने के उद्देश्य से भारतीय मूल्यों पर आधारित आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन देशव्यापी प्रयासों को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री,डॉक्टर रमेश पोखरियालनिशंकजी का उत्साहपूर्ण दिशा-निर्देश प्राप्त हो रहा है। बदलते विश्व में अपने दायित्वों के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता उत्पन्न करना भी नई शिक्षा प्रणाली का एक प्रमुख उद्देश्य है। शिक्षण संस्थानों द्वारा यह प्रयास किया जाना है कि हमारे विद्यार्थी आधुनिक विश्व समुदाय के समर्थ नागरिक बनें। उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा लोक हित और नैतिकता के महत्व पर भी विशेष बल दिए जाने की आवश्यकता है। मानवीय संवेदनाओं व नैतिकता पर आधारित भारतीय जीवन-मूल्यों पर विशेष बल देकर ही हम अपने विश्वविद्यालयों तथा पाश्चात्य विचारों पर आधारित विदेशी विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों के बीच में अंतर कर सकेंगे।

प्यारे विद्यार्थियो,

मजबूत एवं आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हमारी वैश्विक सोच के केंद्र में है। आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय संसाधनों,अनुभवों एवं ज्ञान का उपयोग किया जाना चाहिए। स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए रिसर्च तथा इनोवेशन के माध्यम से स्थानीय विकास को बल प्रदान करके आप सभी प्राध्यापक और विद्यार्थीगण अपनी शिक्षा को सही अर्थों में उपयोगी बना सकते हैं। हमें इस बात पर सदैव ध्यान देना है कि हमारी शिक्षा का लाभ,हमारे व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और देश को भी मिले। विकास यात्रा में अपेक्षाकृत पीछे रह गए देशवासियों के प्रति संवेदनशीलता के साथ उनके उत्थान के लिए प्रयास करके आप सब बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकेंगे। इस संदर्भ में शिक्षा की सार्थकता से जुड़ा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सारगर्भित कथन अत्यंत प्रासंगिक है। बापू ने कहा था,"यदि आपकी शिक्षा कुछ महत्व रखती है तो उसकी सुगंध आपके चारों ओर फैलनी चाहिए।”

गांधी जी ने सर्वोदय के लक्ष्य पर ज़ोर दिया था। सर्वोदय अर्थात सबका उदय। सबके उदय का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब अंतिम व्यक्ति का उदय होगा। उनके अनुसार,सबसे दुर्बल और गरीब व्यक्ति के जीवन और नियति को सुधारने का उद्देश्य ही किसी भी कार्य के उचित होने की कसौटी है। आप सभी विद्यार्थियों को समाज के प्रत्येक सदस्य के लिए संवेदनशीलता और सम्मान का भाव रखना चाहिए। तथा इस सम्मान व संवेदनशीलता के साथ दूसरों के कल्याण के लिए ठोस कार्य करना चाहिए।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस विश्वविद्यालय मेंसेंटर फॉर डायस्पोरा स्टडीज़भी स्थापित है जहां प्रवासियों तथा प्रवास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन अध्ययन किए जा रहे हैं। हमारे देश के इतिहास में सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रवासी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के राज्य में स्थापित विश्वविद्यालय में इस केंद्र की स्थापना सर्वथा उपयुक्त है। गुजरात के परिश्रमी एवं उद्यमी लोगों ने सदियों से दूर-सुदूर के देशों में जाकर अपनी लगन और प्रतिभा के बल पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। एक अध्ययन के अनुसार लगभग 130 देशों में बसे गुजरात के प्रवासी भारतीयों ने समस्त विश्व को अपनी प्रतिभा से प्रभावित किया है और अपनी विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने अपने विश्व-व्यापी दृष्टिकोण,कुछ नया करने की इच्छा तथा उद्यमशीलता के बल पर पूरी दुनिया में भारत की साख बढ़ाई है।

प्यारे विद्यार्थियो,

हम स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। शिक्षा के विषय में स्वामी विवेकानंद ने कहा था,"जो शिक्षा साधारण व्यक्ति को जीवन-संग्राम में समर्थ नहीं बना सकती,जो मनुष्य में चरित्र-बल,पर-हित भावना तथा सिंह के समान साहस नहीं ला सकती,वह भी कोई शिक्षा है! जिस शिक्षा के द्वारा जीवन में अपने पैरों पर खड़ा हुआ जाता है,वही शिक्षा है।” इसी सोच पर आधारित शिक्षा द्वारा हमारे युवा आत्मनिर्भर बनेंगे। ऐसे युवा हीआत्मनिर्भर भारतका निर्माण करने में अपना योगदान देंगे। मैं चाहूंगा कि अन्य राज्यों से यहां शिक्षा प्राप्त करने के लिए आए विद्यार्थी-गण,गुजरात के लोगों द्वारा प्रदर्शित आत्मनिर्भरता,उद्यमशीलता और स्व-रोजगार की संस्कृति को आत्मसात करें। अपने आस-पास के वातावरण से सीखना भी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग है। आप सबकी शिक्षा क्लास-रूम और पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

आज से लगभग पच्चीस वर्ष बाद सन 2047में हमारा देश स्वाधीनता की शताब्दी मनाएगा। आप सभी विद्यार्थियों की पीढ़ी उस ऐतिहासिक अवसर की साक्षी बनेगी। मैं चाहूंगा कि आप सभी आज से ही यह संकल्प लेकर अपनी जीवन यात्रा में आगे बढ़ें कि सन 2047 तक हमारा देश विश्व के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित हो। राष्ट्र-निर्माण के इस संकल्प में मेरी शुभकामनाएं आप सबके साथ हैं।

धन्यवाद,

जय हिन्द!

Go to Navigation