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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का राज्यपाल सम्मेलन-2019 में आरम्भिक उद्बोधन

राष्ट्रपति भवन : 23.11.2019
भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का राज्यपाल सम्मेलन-2019 में आरम्भिक उद

1. राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस सम्मेलन में, आप सभी का, मैं हार्दिक स्वागत करता हूं। इस सम्मेलन में कुल 17 राज्यपाल और उप-राज्यपाल पहली बार शामिल हो रहे हैं। उन सभी का विशेष रूप से अभिनंदन है। पहली बार नव-गठित केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नव-नियुक्त उप-राज्यपाल भी इस सम्मेलन में भागीदारी कर रहे हैं।

2. हमारी संवैधानिक व्यवस्था में राज्यपाल की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आज जब हम सहकारी संघवाद यानि Cooperative Federalism और देश की प्रगति के हित में स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद यानि Competitive Federalism पर ज़ोर दे रहे हैं तो राज्यपाल की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

3. आप सभी राज्यपालों के पास सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण कार्यों को करने का प्रचुर अनुभव है। इस अनुभव और दक्षता का अधिक से अधिक लाभ देश की जनता को मिलना ही चाहिए। अंततः, हम सभी जनता के लिए ही कार्यरत हैं और उसके प्रति उत्तरदायी भी। हमारा यह उत्तरदायित्व, हमारे संविधान में स्पष्ट किया गया है। राज्यपाल की भूमिका संविधान के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण तक सीमित नहीं है। अपने राज्य की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहने की हम सबकी संवैधानिक प्रतिबद्धता भी है। जनता की अपेक्षित सेवा हम तभी कर सकेंगे जब हमारी उपलब्धता अपने राज्य में निरंतर व अधिकतम बनी रहे।

4. हमने इस राज्यपाल सम्मेलन में, अवसर की विशेषता के अनुरूप बदलाव लाने हेतु यह निर्णय लिया कि पहले से सुविचारित मुद्दों पर चर्चा हो। अतः, इस राज्यपाल सम्मेलन की तैयारी नए भारत की नई कार्य संस्कृति के अनुरूप की गई है ताकि सम्मेलन को अधिकाधिक उपयोगी और लक्ष्योन्मुख बनाया जा सके। मैंने वरिष्ठ राज्यपालों के साथ इस सम्मेलन के लक्ष्यों के विषय में चर्चा की थी। इसके बाद राष्ट्रीय महत्व के पांच विषयों को चुना गया और साथ-साथ पांच वरिष्ठ राज्यपालों को इन विषयों की विस्तृत समीक्षा के लिए संयोजक राज्यपाल की ज़िम्मेदारी दी गई। संयोजक राज्यपालों ने अन्य राज्यपालों के सहयोग से इन विषयों पर अलग-अलग उप-समितियां गठित की। इन उपसमितियों के विषयों से संबद्ध मंत्रालयों के मंत्री व सचिव भी परामर्श-प्रक्रिया में शामिल थे। राष्ट्रीय महत्व के ये सभी पांचों विषय जन-कल्याण से जुड़े हुए हैं।

5. जैसा कि हम सभी जानते हैं, जल-संसाधनों का समुचित उपयोग व संरक्षण हमारे देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। जिस प्रकार ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को एक जन-आंदोलन का रूप दिया गया उसी प्रकार ‘जल शक्ति अभियान’ को भी जन-आंदोलन का रूप देने का प्रयास हमें करना है। मैंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के मंत्री एवं सचिव को, इस विषय पर विस्तार से चर्चा के लिए आमंत्रित किया और आप सबने इस उद्घाटन सत्र में जल-शक्ति पर किए गए प्रस्तुतीकरण को देखा जिसमें उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखी है।

6. अनुसूचित जन-जातियों का विकास और सशक्तीकरण, समावेशी विकास के साथ-साथ हमारी आंतरिक सुरक्षा के परिदृश्य से भी जुड़ा हुआ है। विकास की दृष्टि से अपेक्षाकृत पीछे रह गई इन जन-जातियोंके जीवन को बेहतर बनाने में, राज्यपालों को दी गई संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करके, आप सभी उचित मार्ग-दर्शन दे सकते हैं।

7. हमारे देश के अधिकांश लोगों की आजीविका कृषि और कृषि से जुड़े कार्यों पर निर्भर करती है। देश को खाद्यान्न आपूर्ति में स्वावलंबी बनाने वाले हमारे किसान भाई-बहन, अनेक अनिश्चितताओं और कठिनाइयों का सामना करते हैं। उनके कल्याण को ध्यान में रखकर ही, किसानों की आय को दुगना करने का राष्ट्रीय लक्ष्य तय किया गया है। केंद्र सरकार ने किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन प्रयासों का सभी राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू होना, किसानों के लिए बहुत सहायक होगा। कृषि के विषय में, क्षेत्रीय और स्थानीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए आप सब, राज्य सरकारों का उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं।

8. हमारी नई शिक्षा-नीति का लक्ष्य है, भारत को ‘नॉलेज सुपर पावर’ बनाना। हमारी इस महात्वाकांक्षा को मूर्त रूप देने के लिए, उच्च-शिक्षा के हमारे सभी संस्थानों द्वारा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के हर संभव प्रयास करने चाहिए। आप सभी, कुलाधिपति के रूप में अभिभावक का दायित्व भी निभाते हैं। इसलिए, आप सभी से यह अपेक्षा की जाती है कि भारत की भावी पीढ़ी को विश्व-स्तरीय कौशल एवं ज्ञान प्रदान करने के प्रयासों को समुचित मार्ग-दर्शन और शक्ति प्रदान करें।

9. पिछले वर्ष के सम्मेलन में, मैंने यहअनुरोध किया था कि कुलाधिपति के रूप में,आप सभी राज्यपाल-गण, विश्वविद्यालयों को, यूनिवर्सिटीज़ सोशल रिस्पोन्सिबिलिटी यानि यूएसआर के लिए प्रेरित कर सकते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि इस दिशा में कार्य आरंभ हो चुका है और आप लोगों की प्रेरणा से, अनेक उच्च-शिक्षण संस्थानों ने, विद्यार्थियों को, ग्रामीण समाज से जोड़ने के लिए कदम उठाए हैं।

10. हाल ही में, राष्ट्रपति भवन में आयोजित तकनीकी के उच्च-शिक्षण संस्थानों के सम्मेलन में यह सुझाव दिया गया है कि ये संस्थान ‘गवर्नेंस फॉर ईज़ ऑफ लिविंग’ में अपना योगदान दें। उन्हें यह सुझाव दिया गया है कि उन संस्थानों में प्रवेश पाने के इच्छुक विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा दिए जाने वाले आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए एवं सभी आवेदन-पत्रों को ‘सिंगल पेज फॉर्म’ का रूप दिया जाए।

11. देश के लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा उनके जीवन-स्तर को सुधारने के प्रयासों के परिणाम सामने आ रहे हैं। देश के प्रत्येक व्यक्ति के विकास और सशक्तीकरण के उद्देश्य से ‘गवर्नेन्स फॉर ईज़ ऑफ लिविंग’ के बहु-आयामी मानक तय किए गए हैं। मुझे विश्वास है कि बदलाव की यह प्रक्रिया सन 2022 तक बहुत ही स्पष्ट रूप ले चुकी होगी और इस सफलता में राज्यपालों की भी उल्लेखनीय भूमिका होगी।

12. उपरोक्त सभी विषयों पर,पांचों समितियों के संयोजक एवं सदस्य राज्यपालों ने, अलग-अलग बैठकों में, सर्वांगीण और व्यापक चर्चा की है। इन चर्चाओं में, उन विषयों से सम्बद्ध मंत्रालयों के सचिवों की भी सक्रिय भागीदारी रही है। इस प्रकार, केंद्र सरकार और राज्यपालों ने, पारस्परिक भागीदारी और विचार-विनिमय करते हुए इन पांच महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विश्लेषण के बाद, अपनी ड्राफ्ट रिपोर्टें तैयार कर ली हैं।

13. इस सम्मेलन के दौरान, समांतर सत्रों में,संयोजक राज्यपालों के मार्गदर्शन में तैयार की गई ड्राफ्ट प्रस्तुतियों पर, सभी उप-समितियां पुनः विचार-विमर्श करेंगी। इन सत्रों में, राज्यपालों के साथ, सम्बद्ध विभागों के मंत्रीगण, श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, कृषि मंत्री; श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’,मानव संसाधन विकास मंत्री; श्री अर्जुन मुंडा, जन-जातीय कार्यमंत्री; श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, जल शक्ति मंत्री तथा डॉक्टर राजीव कुमार, उपाध्यक्ष नीति आयोग भी भाग लेंगे। सम्बद्ध मंत्रालयों के सचिव भी इन समांतर सत्रों में भागीदारी करेंगे।

14. इन समांतर सत्रों में जो प्रस्तुतियां तय की जाएंगी उन पर, एक बार फिर, सभी राज्यपालों व उपराज्यपालों की उपस्थिति में, सामूहिक चर्चा की जाएगी। इस सामूहिक चर्चा में जो सुझाव दिए जाएंगे, उन पर संवाद करने के बाद, प्रस्तुतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

15. इस सम्मेलन के समापन सत्र में, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री की उपस्थिति में, सभी विषयों पर प्रस्तुतियां हम सबके समक्ष रखी जाएंगी। मुझे विश्वास है कि इतने व्यापक विचार-विमर्श के बाद तय किए गए सारगर्भित विचारों से, इन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर, उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इस पूरी प्रक्रिया में गृह मंत्रालय ने प्रमुख भूमिका निभाई है। इसके लिए गृहमंत्री और उनकी पूरी टीम विशेष बधाई के हकदार हैं।

16. यह हम सब लोगों के लिए प्रसन्नता की बात है कि पिछले सम्मेलन में हुई चर्चा के अनुसार अब तक के राज्यपाल सम्मेलनों के दस्तावेजों को डिजिटल करने का कार्य राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा सम्पन्न कर लिया गया है। इस प्रकार, हमारे देश और संविधान के विकास तथा इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ अब डिजिटल रूप में उपलब्ध हो गया है।

17. अंत में, मैं यह कहना चाहूंगा कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ-व्यवस्था बनने और समावेशी विकास को सुनिश्चित करने से जुड़े राष्ट्रीय संकल्पों को पूरा करने में प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से प्रभावशाली योगदान अपेक्षित है। मुझे विश्वास है कि राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में राज्यों को आगे बढ़ाने के लिए, आप सभी राज्यपाल, अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को बखूबी निभाएंगे।

18. मैं 2019 के इस 50वें राज्यपाल सम्मेलन की सफलता के लिए आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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