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अभिभाषण

भारत-बोलिविया व्यापार-मंच में भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का सम्बोधन

सांता क्रूज़ : 29.03.2019
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भारत-बोलिविया व्यापार-मंच में भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का सम्बोध

1. मुझे भारत-बोलिविया व्यापार मंच को संबोधित करते हुएप्रसन्‍नता हो रही है। मैं राष्ट्रपति मोरालेस को,यहाँ उनकी गरिमामयी उपस्थिति के लिए धन्यवाद देता हूं। हमारी संयुक्त भागीदारी से व्यापार संबंधों को मजबूत करने के प्रति हमारी गहरी पारस्परिक प्रतिबद्धता का पता चलता है। मैं इस आयोजन में भाग लेने के लिए ‘बोलिवियन चैम्बर एंड इंडस्ट्री’ समूहों और ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ तथा ‘भारतीय उद्योग परिसंघ’ का धन्यवाद करता हूं।

2. मुझे भारत की ओर से बोलिविया की पहली राजकीय यात्रा पर आने का सम्मान प्राप्त हुआ है। आज, मुझे बोलिविया का सर्वोच्च पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्‍कार, मेरे देश और मेरे लोगों को दिया गया सम्मान है और राष्ट्रपति मोरालेस द्वारा दिए गए इस विशेष सम्मान के लिए मैं हृदय से धन्यवाद देता हूं। हमारे लिए आगे का कार्य बहुत स्पष्ट है। हमारे राजनीतिक संबंध मजबूत है और आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हमें अपनी आर्थिक साझेदारी को अपनी आपसी समझ के स्तर पर लाने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा। मेरे साथ इस यात्रा में सोने, खनन, बुनियादी ढांचे, आईटी, ऑटोमोबाइल से लेकर ऊर्जा तक – भिन्न-भिन्‍न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली 30 भारतीय कंपनियां भी आई हैं। हम विकास और समृद्धि का नया मार्ग प्रशस्त करने के लिए उनके विचारों और उद्यम को बोलिविया के वाणिज्य और उद्योग के साथ जोड़ना चाहते हैं।

3. आज दिन में,राष्ट्रपति मोरालेस के साथ हुई मेरी चर्चा के दौरान, हम दोनों ने अपने आर्थिक संबंधों को उच्‍चतर स्तर तक ले जाने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की है। हमने विविध क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।हमारे दोनों देशों की अपनी-अपनी विशिष्‍टआर्थिक शक्ति है, और दोनों ही देश विकास और समृद्धि हासिल करने में एक दूसरे के अनुपूरक सिद्ध हो सकते हैं। भारत आज दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हम उपग्रहों, हल्के विमानों, कारों से लेकर उच्च प्रौद्योगिकी वाले प्रमुख औद्योगिक उत्पादों का निर्माण करते हैं। हमारे पास दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा वैज्ञानिक मानव संसाधन पूल है। 40 करोड़ से अधिक के हमारे मध्यम-वर्ग के विशाल बाजार और स्थिर लोकतांत्रिक शासन प्रणाली से पुष्ट गतिशील व्यापारिक वातावरण के साथ मिलकर ये सभी पहलू, भारत को अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य और व्यापार के लिए एक अद्वितीय गंतव्य के रूप में स्थापित करते हैं। व्यापार के अनुकूल वातावरण तैयार करने के हमारे निरंतर प्रयासों के बल पर भारत ने पिछले चार वर्षों में विश्व बैंक व्यापार सुगमता सूचकांक में 65स्थानों की शानदार छलांग लगाई है। भारत व्यापार को गंभीरता से लेता है तथा और अधिक व्यापार के लिए तैयार भी है।

देवियो और सज्जनो,

4. भारतीय अर्थव्यवस्था में कई वर्षों से 7% से अधिक की वृद्धि होती रही है और भविष्य का पूर्वानुमान भी इसी प्रकार की मजबूती का है। इस दर से, 2025 तक हमारी अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। इसके चलते, हमारे वैश्विक हितधारकों के पास हमारे साथ ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधन, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहकारी उद्यम स्थापित करने की अपार संभावनाएं उत्‍पन्‍न हो रही हैं। अपने विशाल प्राकृतिक संसाधनों के बल पर, बोलिवियाहमारे लिए मूल्यवान साझेदार बन सकता है, जिससे दोनों देशों के लिए नए रोजगार और समृद्धि के मार्ग खुल सकते हैं। हां, यह सही है कि व्यापार और निवेश सहयोग में दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी भी एक कारक होती है लेकिन डिजिटल संचार और वैश्वीकरण को देखते हुए निर्बाध संपर्क संभव हुआ है और इस प्रकार -हमने काफी हद तक यह बाधा पार कर ली है।

5. व्यापार के क्षेत्र में, हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं लेकिन इसमें बहुत कुछ करने की गुंजाइश है। पिछले दो वर्षों में दो-तरफा व्यापार ने गति पकड़ी है। 2018 में हमारा कुल द्विपक्षीय व्यापार 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करते हुए 875 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। इसके साथ ही निर्यात के क्षेत्र में भारत बोलिविया के लिए तीसरा सबसे बड़ा गंतव्य देश बन गया है। हम बोलिविया के लगभग 60%सोने का आयात करते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह स्थिति बहुत अच्‍छी है, लेकिन हमें अपने व्यापारिक क्षेत्र को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है। मुझे विश्वास है कि हमारे सभी हितधारकोंअर्थात् बोलिविया के ‘कॉनफेडरेशन ऑफ़ प्राइवेट एंटरप्रेनर्स ऑफ़ बोलिविया’, काइनको’, कैबिनको’ और अन्य तथा भारत के ‘फिक्की’ और ‘सीआईआई’ के प्रयासों से, नए-नए विचार पनप सकते हैं और आगे चलकर उदीयमान कारोबार के रूप में विकसित हो सकते हैं।

6. इस क्षेत्र के साथ व्‍यापार के मामले में भारत की एक विशिष्ट कार्यनीति है। हम अपने व्यापार सहकार को अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिवर्ष भारत-लैटिन अमेरिका और कैरिबियन सम्मेलन का आयोजन करते हैं। इन सम्मेलनों से काफी लाभ हुआ है। कई प्रमुख भारतीय वैश्विक कंपनियों ने इन सम्मेलनों के माध्यम से बोलिविया के बाज़ार में प्रवेश किया है,जिससे अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी,उत्पाद और सेवाएं यहाँ के लोगों तक पहुंची हैं। बोलिवियाई सड़कों पर, हमारे ऑटोमोबाइल उत्पाद अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दवा निर्माता देश है। हमारी उच्च गुणवत्ता वाली और किफ़ायती दवाओं तथा चिकित्सा उपकरण से देशों और सरकारों को न केवल गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य-चर्या उपलब्ध कराने की सक्षमता मिल रही है, बल्कि उनकी लागत भी कम हो पा रही है।

7. आईटी क्षेत्र में भारत की क्षमता ऐसा ही एक अन्‍य महत्वपूर्ण क्षेत्र है जहाँ से बोलिविया को लाभ प्राप्‍त हो सकता है। हमारी आईटी सेवाएं अनेक देशों में सार्वजनिक सेवा को कुशल,लक्षितऔर किफ़ायती बनाने में मदद कर रही हैं। सामाजिक समता और गरीबों के जीवन में सुधार की हमारी आपसी प्रतिबद्धता को देखते हुए, भारत को विकासशील देशों के सहयोग के ढांचे के तहत बोलिविया के साथ अपने ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ कार्यक्रमों के माध्यम से बहुत कुछ साझा करना है।

देवियो और सज्जनो,

8. हम भारत में परिवर्तनकारी आर्थिक विकास लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन हम धरती माता का और प्रकृति का, उसी प्रकार से तथा उसी समर्पण के साथध्‍यान रखना चाहते हैं जिस तरह से आपने किया है। हम चाहते हैं कि हमारी प्रगति को स्वच्छ प्रौद्योगिकी और टिकाऊ कार्य-पद्धतियों से गति प्राप्‍त हो। हम चाहते हैं कि विकास और पर्यावरण संरक्षण का कार्य साथ-साथ चले। हमने स्वच्छ तौर-तरीके विकसित करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना की है। हम इस गठबंधन में बोलिविया का स्वागत करते हैं और इसके समर्थन और सुझावों के साथ हरी-भरी धरती के निर्माण के लिए तत्पर हैं। इस प्रतिबद्धता के भाग के रूप में, वर्ष 2022 तक हमने 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है,जिसमें 100 गीगावाट सौर ऊर्जा शामिल है। हम अपनी क्षमता विकसित कर रहे हैं और साथ ही साथ, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करने में साथी देशों को अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जैव ईंधन के क्षेत्रों में हमें बोलिविया के साथ व्‍यापारिक संबंधों की संभावना नज़र आती है।

9. पर्यावरण और सातत्‍य के क्षेत्र में भारत में इलेक्ट्रिक वाहन विकसित करने का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम आरम्भ किया गया है। और इसके लिए, हम बोलिविया के साथ दीर्घकालिक लीथियम साझेदारी शुरू करना चाहते हैं। भारतीय उद्यम लीथियम उत्पादों को विकसित करने और भंडारण प्रौद्योगिकी में महारत हासिल करने के लिए - निवेश और प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में यहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए उत्सुक हैं। हम उम्‍मीद करते हैं कि इस तरह के उदीयमान उपक्रमों का विकास होगा। भारत ने रेलवे, राजमार्गों, जलमार्गों, वायुमार्गों से लेकर ऊर्जा मार्गों तक, आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास में व्यापक विशेषज्ञता हासिल की है। यह भी हमारे दोनों देशों के संभावित बीच सहयोग का एक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र हो सकता है।

10. कृषि क्षेत्र में भी संभावनाएं मौजूद हैं। भारतीय कृषि-वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण कृषि तकनीकों और उच्च किस्म के बीजों को विकसित करके अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट हासिल किए हैं। हमारी कंपनियां बोलिविया के कृषि क्षेत्र में निवेश करने और हमारे दोनों देशों के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा बढ़ाने की इच्छुक हैं।

11. भारत ने अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में प्रभावशाली प्रगति की है। हमने पहले प्रयास में ही केवल 60 मिलियन अमरीकी डॉलर की बहुत कम लागत पर चंद्रयान का प्रक्षेपण किया। इस प्रक्षेपण पर आई लागत,किसीविज्ञान-कथा आधारित हॉलीवुड की किसी फिल्म बनाने में आई लागत से भी कम है! हमने,पूरे विश्व में पहली बार,एकल प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक104 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया। अब हम 2022 में अपने पहले समानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन की तैयारी कर रहे हैं। मैं समझता हूं कि बोलिविया भी, स्वयं का अंतरिक्ष उपग्रह कार्यक्रम विकसित करने जा रहा है। हम इस क्षेत्र में एक दूसरे के विश्वसनीय साझेदार हो सकते हैं।

देवियो और सज्जनो,

12. दुनिया के साथ अपने आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए, हमने सभी लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों में व्यापारिक यात्राओं के लिए ई-वीजा सुविधा उपलब्ध कराई है। हमें प्रसन्‍नता होगी अगर हमारे व्यापारिक समुदाय को बोलिविया की यात्रा अधिक सुगमता पूर्वक कर पाने और देश में बेहतर अनुमानित कारोबारी माहौल उपलब्‍ध कराकर प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे भविष्‍य की बेहतर योजना बना सकें तथा हमारी साझेदारी को और मजबूत बना सकें।

13. इन्हीं शब्दों के साथ, मैं एक बार फिर राष्ट्रपति मोरालेस को उनकी गरिमामयी उपस्थिति और भारत-बोलिविया के आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद देता हूं। और मेरी कामना है कि आप सभी अपने-अपने व्यावसायिक प्रयासों में सफलता प्राप्त करें।

मुचास ग्रेसियास। धन्यवाद।

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