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अभिभाषण

भारतीय राजस्व सेवा के 72वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का सम्बोधन

राष्ट्रपति भवन : 08.03.2019
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भारतीय राजस्व सेवा के 72वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात के अवसर पर भा

1. सुप्रभात। राष्ट्रपति भवन में आप सभी का स्वागत है। सबसे पहले सिविल सेवा परीक्षा में आपकी सफलता के लिए, और भारतीय राजस्व सेवा का चयन करने के लिए आप सभी को बधाई। मेरे सामने बैठे प्रशिक्षु-अधिकारी युवा भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व करते हैं। मुझे विश्वास है कि आप सभी अपनी क्षमता के अनुरूप राष्ट्र की और भारत के लोगों की सेवा करेंगे और समर्पण, सेवा और ईमानदारी के जीवन-मूल्यों में निहित उच्च पेशेवर मानक स्थापित करेंगे।

2. आपका बैच वास्तव में बहुत विविधता लिए हुए है। आप देश के भिन्‍न–भिन्‍न भागों से आते हैं। मुझे बताया गया है कि आप में से एक चौथाई लोग ग्रामीण पृष्ठभूमि के हैं और आप में से एक चौथाई महिला अधिकारी हैं। ये विविधता और सामाजिक प्रगति के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। 100 से अधिक इंजीनियर या डॉक्टर वाले इस बैच की शैक्षिक पृष्ठभूमि भी विविध है। मैंने पाया है कि आप में से कुछ अधिकारी चार्टर्ड एकाउंटेंट भी हैं और इसलिए आपने आयकर कार्यालय को दूसरे पक्ष की दृष्टि से भी देखा है।

3. आपकी सेवा प्रत्यक्ष करों- जैसे कि आयकर, कॉर्पोरेट कर और धन कर के संग्रह में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आयकर विभाग का आदर्श वाक्य 'कोष मूलो दंड:' है जिसका अर्थ है कि 'राजस्व अथवा राजकोष प्रशासन की रीढ़ है। चाणक्य के ये शब्द राष्ट्र निर्माण और सुशासन के लिए कर राजस्व के महत्व पर बल देते हैं। वास्तव में, कर से विकास और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को वित्त प्राप्त होता है - तथा इससे राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इसे देखते हुए, आप सभी से हमें बहुत अधिक अपेक्षाएं हैं।`

4. भारत दुनिया की सर्वाधिक तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थव्यवस्था है। आने वाले दशक में, इसकी जीडीपी दोगुनी से अधिक हो जाने की उम्मीद है। इससे सभी क्षेत्रों में अधिक से अधिक अवसर उत्पन्न होंगे। इससे कर राजस्व बढ़ेगा और राजस्व अधिकारियों के लिए चुनौतियां भी बढ़ेंगी। आपको इन चुनौतियों का मुकाबला करते हुए हमारे देश के आर्थिक इंजन को ऊर्जा देनी होगी। आपकी सफलता से आपके व्यक्तिगत भविष्य के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा और गति का भी निर्धारण होगा।

5. भारतीय राजस्व सेवा प्रौद्योगिकी को अपनाने में सबसे आगे रही है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने; ईमानदार कर दाताओं और कर अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क को कम करने;और प्रत्यक्ष डेबिट द्वारा समय पर कर वापसी जैसे कार्यों में प्रगति देखी गई है। इस प्रक्रिया को जारी रखना और आगे बढ़ाना है। भारत में कर और जीडीपी के बीच के अनुपात में सुधार और कर के दायरे को बढ़ाने की की आवश्यकता है। लेकिन यह कार्य प्रोत्साहन द्वारा किया जाना है, जबरदस्ती नहीं।

6. कर प्रणाली जितनी सरल होगी, अनुपालन सुनिश्चित करना उतना ही आसान होगा। याद रखें कि कर दाता आपका सहभागी है, न कि आपका विरोधी। एक बार पुनः यहाँ चाणक्य के शब्द प्रासंगिक नज़र आते हैं। उन्होंने कहा था कि सरकारों को कर उसी तरह लेना चाहिए, जैसे मधुमक्‍खी फूल से केवल उचित मात्रा में ही शहद लेती है और यह सुनिश्चित करती है कि दोनों का ही अस्तित्‍व बना रहे। आपकी भूमिका नीतिगत है और नियामक की भी है, लेकिन आप मुख्य रूप से सेवा प्रदाता हैं। ईमानदार कर दाता किसी सेवा के लिए आपके पास आता है इसलिए कृपया उसकी मांगों और गरिमा के प्रति संवेदनशील बनें। शिष्टता, शालीनता, विनम्रता और सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखने से कर दाताओं और कर संग्रहकर्ताओं के बीच आपसी विश्वास और सहयोग बनाने में बहुत सहायता मिलेगी।

7. हाल के वर्षों में सरकार ने हमारी वित्तीय प्रणाली को पारदर्शी बनाने और काले धन से उत्पन्न संकट के समाधान के लिए कई पहल की हैं। इस लड़ाई में आईआरएस अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नोटबंदी, आय घोषणा योजना, और बेनामी लेनदेन निषेध अधिनियम में संशोधन जैसे कदमों से हमारी अर्थव्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की हमारी जनता और सरकार की इच्छाशक्ति का पता चलता है।

8. भारत युवाओं का देश है। विश्व बैंक के अनुसार, वर्ष 2021 में हमारे आधे से अधिक नागरिक 30 वर्ष से कम उम्र के होंगे। हमारे युवा उद्यमी, मेहनती, रचनात्मक और दृढ़ प्रतिज्ञ हैं। वे यह सुनिश्चित करने के लिए संकल्‍पबद्ध हैं कि हमारा वित्तीय व्यवहार, व्यवसाय और कर प्रणाली आधुनिक, पारदर्शी, न्यायोचित और मजबूत बनें। आईआरएस अधिकारियों के रूप में, आपको इस युवा भारत के साथ समन्वय स्थापित करते हुए काम करना होगा। हमारे आर्थिक विकास में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह विकास न्यायसंगत हो, एक आवश्यक शर्त है। आप सब मिलकर हमारी वित्तीय प्रणाली को साफ़-सुथरा बना सकते हैं। युवा कर अधिकारियों के रूप में आपको यह अवसर मिला है। यह आपकी जिम्मेदारी भी है और मौका भी।

9. अपनी बात पूरी करते हुए मैं कहूंगा कि मुझे ईमानदारी और अनुकरणीय निष्‍ठा की महत्‍ता समझाने की जरूरत नहीं दिखाई देती। हमारे आर्थिक और राष्ट्रीय जीवन के लिए इतनी महत्वपूर्ण सेवा के लिए, ईमानदारी एक निश्चित प्रतिमान है। आम लोगों को हमारे लोक सेवकों और विशेष रूप से आईआरएस अधिकारियों से बहुत उम्मीदें हैं। आप सरकार और नागरिकों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक हैं। आपके आचरण और आपकी तत्‍परता के आधार पर, लोग सरकार के बारे में राय बनाते हैं। आपको यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि आपको आपके अधिकार और प्राधिकार "हम भारत के लोग" से प्राप्त होते हैं, ताकि आप भारत के उन लोगों की सेवा कर सकें।

10. मैं आप सभी को अपने पेशेवर कॅरियर और निजी जीवन के लिए शुभकामनाएं देता हूं और कामना करता हूँ कि आप बड़ी से बड़ी सफलता प्राप्त करें तथा समाज और भारत की बेहतरी के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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