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अभिभाषण

12वें ग्लोबल हेल्थकेयर समिट के उद्घाटन पर भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का सम्बोधन

मुम्बई : 28.12.2018
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12वें ग्लोबल हेल्थकेयर समिट के उद्घाटन पर भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन

1. मुझे ‘अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडियन ओरिजिन’ जिसे आम तौर पर ‘एएपीआई’ के नाम से जाना जाता है, के द्वारा आयोजित ग्लोबल हेल्थ समिट में आने पर खुशी हुई है।आपकी एसोसिएशन केवल डॉक्टरों और चिकित्सकों का मंच नहीं, बल्कि इससे कहीं अधिक है।यह एसोसिएशन दो जीवंत और लोकतांत्रिक समाजों के बीच एक कड़ी है; और इन दोनों समाजों ने प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का अपने-अपने तरीके से समाधान किया है।

2. एएपीआई केवल साढ़े तीन दशक पुराना है लेकिन इसके पास अपने कार्यक्षेत्र का बहुत प्रभावशाली अनुभव है।मैं समझता हूं कि यह संस्‍था संयुक्त राज्य अमेरिका में किसी जातीय मूल पर आधारित सबसे बड़ी गैर-लाभकारी चिकित्सा संस्था है।आपकी एसोसिएशन एक मिनी-इंडिया है, जिसमें हमारे देश के सभी हिस्सों से आए डॉक्टर शामिल हैं।

3. एएपीआई और इसके सदस्य सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्‍सा के सभी क्षेत्रों में योगदान करते हैं।आपसे विधायी और नीतिगत मुद्दों पर परामर्श लिया जाता है और आप लोग अत्याधुनिक अनुसंधान कार्य में शामिल रहते हैं। सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात, जिससे मुझे ख़ुशी हुई है, वह यह है कि आप लोग विविध प्रकार के लोगों जिनमें पिछड़े इलाकों में रहने वाले समुदाय भी शामिल हैं, के लिए चिकित्सा देखभाल और उपचार प्रदान करने का जिम्मा भी उठाते हैं।ज्ञान और सेवा-आधारित भारत की संस्कृति और सेवा के प्रति यह एक प्रकार की श्रद्धांजलि है कि अमेरिका में हर सात में से एक मरीज़ का इलाज किसी भारतीय या भारतीय मूल के चिकित्सक द्वारा होता है।

4. अमेरिका में भारतीय डॉक्टरों के पेशेवर-रवैये और सद्भावना ने उनका दिल जीत लिया है और इससे आपको उचित प्रतिष्ठा प्राप्‍त हुई है।वास्तव में, इस कारण भारत को यदा-कदा राजनयिक लाभ भी प्राप्‍त हुआ है जिसके लिए आपकी एसोसिएशन की प्रशंसा की जानी चाहिए।

5. प्रवासी भारतीय दुनिया भर में फैले हुए हैं।फिर भी, जहाँ कहीं भी ये जाते हैं, अपनी कुछ खूबियां लेकर जाते हैं। ये लोग अपने साथ लोकतांत्रिक मूल्य और बहुलवादी सिद्धांत लेकर जाते हैं।जहां कहीं भी ये रहते और काम करते हैं, उस समाज के कल्याण और समृद्धि, नवाचार और मूल्य निर्माण में अपना योगदान देते हैं।ये लोग अपने द्वारा अपनाए गए देश और अपने मूल देश के बीच एक सेतु समुदाय के रूप में कार्य करते हैं - जैसा कि अमेरिका और भारत के मामले में देखा जा सकता है।

6. इस संबंध में, मुझे यह जानकर खुशी हुई कि आपकी एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के साथ, राज्य सरकारों के साथ और अनेक चिकित्सा और शैक्षणिक संस्थाओं के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य के एजेंडे को आगे बढ़ाया है।एएपीआई और इसके सदस्यों ने अन्य मामलों के साथ-साथ, मधुमेह के इलाज, टीबी की चुनौती का मुकाबला करने, मस्तिष्क की चोटों संबंधी प्रबंधन दिशा निर्देशों के विकास और ग्रामीण स्वास्थ्यचर्या में मदद की है।

7. दूसरे क्षेत्रों की तरह, इन क्षेत्रों में भी, अमेरिका में ऐसे कई आदर्श तरीके विकसित किए गए हैं जिन्हें भारत में मरीजों के लाभ के लिए अनुकूलित करके उपयोग में लाया जा सकता है।उदाहरण के लिए, प्राथमिक उपचारकर्ता और पैरामेडिक्स की प्रणाली अमेरिका में बहुत अच्छी तरह से विकसित हो चुकी है।किसी चिकित्सा स्थिति के समाधान की प्रारंभिक अवस्था में इससे मदद मिल सकती है - और जीवन रक्षा के साथ-साथ अधिकजटिल उपायों की आवश्यकता से बचा जा सकता है।यह एक ऐसा तंत्र है जिसे सरकार भारत में भी लागू करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।

8. मुझे बताया गया है कि आपकी एसोसिएशन और इसके साझेदारों ने महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण दिया है।इस तरह के प्रशिक्षण सड़क दुर्घटनाओं के बाद की या किसी आपात स्थिति से निपटने में बहुत काम आ सकते हैं।मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप इस प्रक्रिया को आगे और गंभीरता से लागू करें, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां मरीज़ और बहु-विशेषज्ञता युक्‍त अच्‍छे एक सर्वसुविधा युक्त अच्छे अस्पताल के बीच दूरी काफी अधिक होती है।

9. मैं अक्सर सार्वजनिक स्वास्थ्य और इसकी उपलब्‍धता की तुलना गुणवत्ता, लागत और पहुंच की शानदार तिकड़ी से करता हूं। इन तीनों का सही जगह पर होना महत्वपूर्ण है क्‍योंकि इन तीनों को मिलकर काम करना होता है। गुणवत्तापूर्ण दवाएं और अत्याधुनिक चिकित्सा नवाचार होने का तब तक कोई मतलब नहीं है जब तक कि ये किफायती न हों और उन लोगों के लिए उपलब्ध न हों जिन्हें इनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।इसी तरह, कीमतें कम होना महत्वपूर्ण है लेकिन गुणवत्ता की कीमत पर नहीं।रोग किसी के साथ भेदभाव नहीं करता है, और इसीलिए चिकित्सा और स्वास्थ्यचर्या के कार्य में भी भेदभाव नहीं होना चाहिए।

10. गुणवत्ता, लागत और पहुंच की इस शानदार तिकड़ी की उपलब्धि कैसे की जा सकती है?एक रास्ता तो यह है कि - डॉक्टरों और मरीज समूहों के बीच, समाज और उद्योग के बीच, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के बीच और अंततः देशों के बीच परस्‍पर गठबंधन हो। भारत और अमेरिका फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में - नैदानिक ​​अनुसंधान, औषध आविष्‍कार और विनिर्माण में एक दूसरे के अनुपूरक हैं।सस्ती लेकिन उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं और औषधियों के उत्पादन के भारत के अनुभव बहुत लाभकारी हैं क्‍योंकि पूरी दुनिया–और स्‍वयं अमेरिका भी - स्वास्थ्यचर्या और स्वास्थ्य बीमा की लागत को घटाने के लिए प्रयासरत है।

11.ये दोनों देश, वैश्विक महामारियों और उभरतीपशुजन्यबीमारियों केसमाधान के लिए भी साथ-साथ काम कर सकतेहैं।ये चुनौतियां विश्वव्यापी हैं और ये चुनौतियां राष्ट्रीय सीमाओं को नहीं मानती। एक अन्य साझा चुनौती - जीवन-शैली सम्बन्धी बीमारियों की है। ये बीमारियां हैं - मधुमेह और मोटापे की और ये दोनों रोग भारत और अमेरिका दोनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य का गंभीर विषय बने हुए हैं।जीवन-शैली जन्‍य बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन में सहयोग की गुंजाइश है,और इसमें पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का सामंजस्‍य आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ किया जाना भी शामिल है। कृपया विचार करें कि आपका संगठन इस क्षेत्र में क्या कर सकता है।

12. ‘सर्वे सन्‍तु निरामया’का लक्ष्य हमारेकार्यक्रमोंऔर नीतियों काअभिन्न अंग होना चाहिए।मुझे यह जानकर बहुत खुशी हो रही है कि भारत सरकार बिल्कुल ऐसा ही कर रही है। भारत सरकार ने अपने एक प्राथमिक लक्ष्य के रूप में तय किया है कि भारत के सभी नागरिकों के लिए सर्व-समावेशी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाए।

13.भारत सरकार द्वारा किए गए अनेक उपायों का उद्देश्‍य,देश में स्वास्थ्यचर्या के मुद्दों का समाधान करने का है।देश भर में नए एम्स खोलने की योजना है औरअनेक मेडिकल कॉलेजों मेंसुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं।इसके अलावा,चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और सुधार के लिए,कई नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है और भारतीय चिकित्सा परिषद् के स्थान पर प्रतिष्ठित चिकित्सकों की सदस्‍यता वाला नया‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ बनाया गया है।‘प्रधानमंत्रीभारतीयजन-औषधि परियोजना’ के तहत,सभी के लिए, विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्ग के लोगों के लिए किफायती मूल्‍य कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए देश भर में चार हजार छह सौ से अधिक मेडिकल स्टोरस्थापित किए गए हैं।इसके अलावा,चिकित्सीय इंप्‍लांटों और कई जीवन रक्षक औषधियों की लागत भी कम की गई है।

14.इस बीच, निवारक स्वास्थ्यचर्या पर जोर देते हुए,भारत सरकार नेमई,2016 मेंउज्ज्वला योजनाशुरू की। अभी तक स्वच्छ ईंधन से वंचित रहे,लगभग6करोड़परिवारोंको एलपीजी कनेक्शन प्रदान करके,उज्ज्‍वलायोजनाने यह सुनिश्चित किया है किकरोड़ों महिलाएँ और बच्चे अब खाना पकाने के ईंधन के रूप में जलाऊ लकड़ी,कोयले और कंडों के उपयोग से होने वाले प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों का सामना नहीं करेंगे।

15.ये सभी उपायस्वास्थ्य सेवा को साकल्‍यवादी और सभी वर्गों के लिए अधिक साध्‍य बनाने के इरादे से किए गए हैं।फिर भी,स्वास्थ्य देखभाल में सर्वाधिक दूरगामी पहल‘आयुष्मानभारतयोजना’ की है, जिसे हाल ही में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया है।इस योजना मेंछोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक,हमारे सभी लोगों को व्यापक चिकित्सा सेवा उपलब्ध करानी होनी शुरू की गई है।यह योजना विशेष रूप से, समाज के सर्वाधिक पिछड़े हमारे40 प्रतिशत देशवासियों पर लक्षित है।

16.‘आयुष्मानभारत’ का महत्व केवल भारत के लिए ही नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा है।इसकी सफलता से,उभरती अर्थव्यवस्थाओं और कमजोर समुदायों के बीच लागत प्रभावी सार्वभौमिक स्वास्थ्यचर्या पहुंचाने के लिए एक उदाहरण पेश होगा।मुझे यह जानकर खुशी हुई कि शुभारम्भ के तीन महीनों के भीतर हीप्रधानमन्त्रीजनआरोग्ययोजना-आयुष्मान भारत के तहत,समाज के पिछड़े वर्गों केसाढ़े छहलाखसेअधिकमरीजों को देश भर के अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया जा चुका है और अस्पताल में उनकी भर्ती के लिए850करोड़रु. से अधिक की राशि स्‍वीकृत की जा चुकी है।

17.‘आयुष्मानभारत’योजना,"देखभाल की निरंतरता" के दृष्टिकोणपर जोर देती हैजो केवल सरकार पर निर्भर नहीं हो सकती है। निजी क्षेत्र की भूमिका,व्यक्तिगत चिकित्सकों की भूमिका और आपके जैसे पेशेवर समूहों की भूमिका-इन सबका महत्‍व है। ऐसे निजी अस्पताल मौजूद हैं जिन्होंने सरकारों से रियायती शर्तों पर भूमि प्राप्त की। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए अपने बिस्तरों का कुछ प्रतिशत आरक्षित करने और उन्हें मुफ्त उपचार प्रदान करने के लिए उन्‍होंने प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की थी। ऐसे सभी अस्पतालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करें और सुनिश्चित करें किऐसे रोगियों केलिए आरक्षित बिस्तरखाली न रहें। यह,न केवल उनका कानूनी दायित्व है, बल्कि चिकित्सीय नैतिकता के अनुरूप भी है।

18.कोई भी व्यक्ति जो भारत के हित में अपना हित देखता है या कोई भी व्‍यक्ति जिसकी हिस्‍सेदारी सार्वजनिक स्वास्थ्य में है, उसकी अनिवार्य रूप सेसाझेदारी आयुष्मानभारतमें है।इसी कारण से,मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि आप जिस प्रकार से भी चाहें, इसमें भाग लेकर और इसका समर्थन करके,या इसके डिजाइन और कार्यान्‍वयन के संदर्भ में सुझाव देकर,इस संभावनापूर्ण निर्णायक पहल का हिस्सा बनें।मुझे,इस सम्मेलन से यह उम्‍मीद रहेगी कि इसमेंआयुष्मानभारतपर कार्रवाई योग्य विचार उभरकर सामने आएंगे।

19.इन्‍हीं शब्दों के साथ,मैं आपकी एसोसिएशन और व्यक्तिगत रूप से आप सभी को सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं देता हूं।और मैं आपको आने वाले नए साल की भी शुभकामनाएं देता हूं!

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