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प्रेस विज्ञप्ति

भारत की राष्ट्रपति अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल हुईं और हरियाणा सरकार की स्वास्थ्य, सड़क परिवहन और शिक्षा से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ/शिलान्यास किया

राष्ट्रपति भवन : 29.11.2022

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज 29 नवंबर, 2022 को कुरुक्षेत्र, हरियाणा में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में भाग लिया। उन्होंने 'मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सर्वेक्षण योजना' की भी शुरूआत की; और सभी सार्वजनिक सड़क परिवहन सुविधाओं के लिए हरियाणा ई-टिकटिंग परियोजनाओं के साथ-साथ वर्चुअल माध्यम से सिरसा में एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की आधारशिला रखी।

इस अवसर पर बोलते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता सही अर्थों में एक वैश्विक ग्रंथ है।अनेक भाषाओं में गीता के कई अनुवाद हो चुके हैं। यह भारतवर्ष का सर्वाधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय ग्रंथ है। जितनी टीकाएं गीता पर लिखी गयी हैं, उतनी शायद ही किसी अन्य पुस्तक पर लिखी गई होंगी। जिस तरह योग, पूरे विश्व समुदाय को भारत की सौगात है, उसी प्रकार योग-शास्त्र गीता भी, पूरी मानवता को भारत माता का आध्यात्मिक उपहार है। गीता पूरी मानवता के लिए एक जीवन-संहिता है और आध्यात्मिक दीप-स्तंभ है।

राष्ट्रपति ने कहा कि गीता हमें कर्म करने और फल की चिंता नहीं करना सिखाती है। नि:स्वार्थ कर्म करना ही जीवन का सही मार्ग है। कर्म करने में ही जीवन सार्थक हो जाता है, अकर्म और कामना दोनों का त्याग हो जाता है। सुख-दुःख में समान रहना, लाभ-हानि को समान भाव से स्वीकार करना, मान-अपमान से विचलित न होना और सभी परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखना - गीता का बहुत उपयोगी संदेश है।

राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता विपरीत परिस्थितियों में उत्साहवर्धन और निराशा में आशा का संचार करने वाला ग्रंथ है। यह जीवन-निर्माण करने वाला ग्रंथ है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजकों से गीता के संदेश के प्रचार-प्रसार के लिए अनवरत प्रयास करने का अनुरोध किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि गीता के उपदेश को आचरण में ढालना अधिक महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वास्थ्य सर्वेक्षण योजना और ओपन लूप टिकटिंग प्रणाली का शुभारंभ करने और सिरसा में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की आधारशिला रखकर मुझे संतोष का अनुभव हुआ है। उन्होंने कहा कि ये कार्य हमें गीता के कथन 'सर्व-भूत-हिते रता:' की याद दिलाते हैं , अर्थात ‘समस्त प्राणियों के हित में लगे हुए लोग’ भगवान के कृपा-पात्र होते हैं। उन्होंने इन जन-कल्याणकारी परियोजनाओं के लिए हरियाणा सरकार की प्रशंसा की।

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