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प्रेस विज्ञप्ति

भारत की राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया

राष्ट्रपति भवन : 05.09.2022

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में देश के 45 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अपने शिक्षकों को स्‍मरण किया और कहा कि शिक्षकों ने न केवल उन्हें पढ़ाया बल्कि प्यार भी दिया और संघर्ष करने की प्रेरणा भी दी। अपने परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन के बल पर ही वह कॉलेज जाने वाली अपने गाँव की पहली बेटी बनीं। उन्‍होंने कहा कि अपनी जीवन-यात्रा में वे जहां तक पहुंच सकी हैं उसके लिए अपने उन शिक्षकों के प्रति वे सदैव कृतज्ञता का अनुभव करती हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार विकास के आधार हैं। इन क्षेत्रों में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाने की आधारशिला स्कूली शिक्षा द्वारा ही निर्मित होगी। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि विज्ञान, साहित्य, अथवा सामाजिक शास्त्रों में मौलिक प्रतिभा का विकास मातृभाषा के द्वारा अधिक प्रभावी हो सकता है। हमारी माताएं ही हमारे जीवन के आरंभ में हमें जीने की कला सिखाती हैं। इसीलिए प्राकृतिक प्रतिभा को विकसित करने में मातृभाषा सहायक होती है। माता के बाद शिक्षक-गण हमारे जीवन में हमारी शिक्षा को आगे बढ़ाते हैं। यदि शिक्षक भी मातृभाषा में पढ़ाते हैं तो विद्यार्थी सहजता के साथ अपनी प्रतिभा का विकास कर सकते हैं। इसीलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली-शिक्षा तथा उच्च-शिक्षा के लिए भारतीय भाषाओं के प्रयोग पर ज़ोर दिया गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विज्ञान और अनुसंधान के प्रति रुचि पैदा करना शिक्षकों की ज़िम्मेदारी है। अच्छे शिक्षक प्रकृति में मौजूद जीवंत उदाहरणों की सहायता से जटिल सिद्धांतों को आसान बनाकर समझा सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों के बारे में एक लोकप्रिय कथन का जिक्र करते हुए कहा "सामान्य शिक्षक जानकारी देते हैं। अच्छे शिक्षक समझाते हैं। श्रेष्ठ शिक्षक करके दिखाते हैं। महान शिक्षक प्रेरणा देते हैं।” उन्होंने कहा कि एक आदर्श शिक्षक में चारों बाते होती हैं। ऐसे आदर्श शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन की रचना करके सही अर्थों में राष्ट्र-निर्माण करते हैं।

राष्ट्रपति ने सभी शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने की तथा शंका व्यक्त करने की आदत को प्रोत्साहित करें । उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक प्रश्नों का उत्तर देने तथा शंकाओं का समाधान करने से शिक्षकों के ज्ञान में भी वृद्धि होगी। एक अच्छा शिक्षक सदैव नयी शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्वयं भी उत्साहित रहता है।

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