भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का भारतीय रिजर्व बैंक की 90वीं वर्षगांठ के समापन समारोह में संबोधन
मुंबई : 01.04.2025

भारतीय रिजर्व बैंक 90वीं वर्षगांठ समारोह मना रहा है, इस अवसर आप सबके साथ उपस्थित होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। इस स्मरणीय अवसर पर मैं आरबीआई के गवर्नर और डिप्टी गवर्नर, निदेशकों और कर्मचारियों, भूतपूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों को बधाई देती हूं, जिन्होंने इसे एक महान संस्था बनाया है।
केंद्रीय बैंक के रूप में आरबीआई केंद्रीय बैंक के रूप में, भारत की अविश्वसनीय विकास कहानी का केंद्र रहा है। यह आजादी से पहले जब भारत में व्यापक गरीबी थी तब से लेकर आज जब हम विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं, देश की की पूरी यात्रा का साक्षी रहा है। चूंकि इसकी स्थापना 1935 में हुई थी, इसलिए आरबीआई इस क्रम में एक कदम आगे था और वास्तव में इसने देश की इस यात्रा में मार्गदर्शन किया।
मुझे यह कहने में कोई संशय नहीं है कि आरबीआई देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। क्या यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर से कागज का एक टुकड़ा वैध मुद्रा बन जाती है? किसी और के हस्ताक्षर में यह शक्ति नहीं है। हर किसी को अपने दैनिक जीवन को चलाने के लिए उस कागज के टुकड़े की आवश्यकता होती है। एक आम आदमी अथवा महिला का आरबीआई से सीधा संपर्क तो नहीं होता है - सिवाय इसके की उनकी जेब में रखे नोटों पर आरबीआई छपा होता है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से बैंकों और अन्य माध्यमों से उनके सभी वित्तीय लेन-देन पर आरबीआई का नियंत्रण होता है।
देशवासियों का सहज रूप से आरबीआई द्वारा देखरेख की जाने वाली वित्तीय प्रणाली में पूरा भरोसा है। नौ दशकों में आरबीआई की सबसे बड़ी उपलब्धि देशवासियों का यह भरोसा है।
आरबीआई ने मूल्य स्थिरता, विकास और वित्तीय स्थिरता के अपने अधिदेश को मजबूती से बनाए रखते हुए यह भरोसा अर्जित किया है। साथ ही, इसने विकसित हो रहे देश की आने वाली जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार स्वयं को तैयार रखा है। 1990 के दशक के आर्थिक उदारीकरण से लेकर कोविड-19 महामारी जैसी प्रमुख चुनौतियों के प्रति इसके द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से इसके लचीलेपन और समय के अनुसार ढल जाने का पता चलता है। दुनिया के तेजी से हो रहे वैश्वीकरण में इसने यह भी सुनिश्चित किया है कि भारत की वित्तीय प्रणाली किसी भी प्रतिकूल अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड्स के अनुसार लचीली बनी रहे।
भारतीय रिजर्व बैंक एक केंद्रीय बैंक से कहीं अधिक है, इसने वित्तीय समावेशन और संस्था निर्माण पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संस्था निर्माण के लिए, आरबीआई ने पिछले कुछ वर्षों में नाबार्ड,आईडीबीआई, सिड्बी और राष्ट्रीय आवास बैंक जैसे प्रमुख संस्थानों की स्थापना करके वित्तीय इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान की है। इस प्रकार इसने कृषि, छोटे व्यवसायों और आवास के लिए आवश्यक सहायता प्रदान की है। लीड बैंक योजना जैसी पहलों ने बैंकों की पहुंच के विस्तार की नींव रखी है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आर्थिक विकास समावेशी और व्यापक हो।
वित्तीय समावेशन के लिए, इसने एक सक्षम नियामक ढांचा प्रदान करके पीएम जन धन योजना का समर्थन किया है। यह प्रसन्नता की बात है कि जन धन योजना में महिलों के खाते बड़ी संख्या में हैं। सार्वजनिन वित्तीय पहुँच के विजन को प्राप्त करने और औपचारिक बैंकिंग का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने में इसका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
डिजिटल भुगतान में भारत को विश्व में अग्रणी बनाने में आरबीआई की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देश के भुगतान ढांचे को लगातार आधुनिक बनाते हुए इसने यह सुनिश्चित किया है कि डिजिटल लेनदेन न केवल आसान और बेहतर हों, बल्कि सुरक्षित भी हो। आरबीआई यूपीआई जैसे नवाचारों से वित्तीय पहुँच के क्षेत्र में क्रांति लेकर आया है, जिससे तत्काल, कम लागत वाले लेनदेन संभव हुए हैं और वित्तीय समावेशन बढ़ा है। भुगतान के अलाबा, आरबीआई ने एक जीवंत फिन-टेक इकोसिस्टम तैयार किया है।
जैसे-जैसे भारत तेजी से प्रौद्योगिकी-संचालित वित्तीय इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है, आरबीआई को अपने उपभोक्ता संरक्षण ढांचे को मजबूत बनाए रखना है, उभरती चुनौतियों का सामना करते हुए हमारी वित्तीय प्रणाली के आधार- विश्वास और स्थिरता को बनाए रखना है।
देवियो और सज्जनो,
आरबीआई ने भी अपनी नीतियों के केंद्र में उपभोक्ता हितों को रखते हुए लगातार लोगों के विश्वास को बनाए रखा है। आज भी जमा बीमा ग्राहक सुरक्षा का एक अनिवार्य पहलू है। आरबीआई ने ग्राहकों की शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी तरीके से समाधान करते हुए अपनी शिकायत निवारण प्रणालियों को मजबूत बनाए रखा है। एकीकृत लोकपाल योजना से प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित हुई है, जिससे ग्राहकों को सुलभ पहुँच और तेज़ समाधान मिल रहा है।
वित्तीय जागरूकता उपभोक्ता संरक्षण का एक प्रमुख स्तंभ होता है। आरबीआई के अभियानों और प्रकाशनों से लोगों को बैंकिंग जोखिमों को समझने, धोखाधड़ी को पहचानने और सुविचारित वित्तीय निर्णय लेने में सहायता मिली है।
तीव्र तकनीकी विकास से, वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर खतरों का जोखिम भी बढ़ा है। यह बढ़ती चिंता के लिए निरंतर सतर्क रहना जरुरी है, और इसके लिए आरबीआई द्वारा सक्रिय उपाय किए जा रहे हैं, सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा रहा है जिससे एक बैंकिंग के लिए एक सुरक्षित वातावरण बना है।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई पर्यावरण के लिए भी आरबीआई की प्रतिबद्धता है। जलवायु परिवर्तन के इस समय में, यह प्रशंसा की बात है कि आरबीआई स्थायी वित्त को बढ़ावा देने के लिए नए-नए कदम उठा रहा है। सरकार जब हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है, आरबीआई ने ग्रीन डिपॉजिट फ्रेमवर्क जैसे उपायों के माध्यम से इस विजन को आगे बढ़ाया है, जिसमें पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए निधि लगाई जाती है, तथा इसमें बैंकों द्वारा पर्यावरण अनुकूल पहलों का सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के अंतर्गत हरित वित्त भी शामिल है।
देवियो और सज्जनो,
आरबीआई ने बदलते समय के साथ स्वयं का विकास किया ही है साथ ही भारत के वित्तीय परिवर्तन का यह एक प्रमुख योजनाकार रहा है। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने से लेकर मौद्रिक स्थिरता बनाए रखने और मजबूत आर्थिक विकास संभव करने तक, देश की अर्थ-व्यवस्था को आकार देने में इसकी मूल भूमिका रही है।
विगत 90 वर्षों में आरबीआई की उल्लेखनीय यात्रा सरकार के दृष्टिकोण और नीतियों से निकटता से जुड़ी हुई है। जटिल आर्थिक परिवर्तनों से निपटने, महत्वपूर्ण वित्तीय सुधारों को लागू करने और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में यह स्थायी भागीदारी महत्वपूर्ण रही है।
जैसे-जैसे भारत का स्वाधीनता शताब्दी वर्ष निकट आ रहा है, ‘विकसित भारत 2047’ का मिशन के लिए एक ऐसे वित्तीय इकोसिस्टम आवश्यकता होगी जो नवोन्मेषी, समय-अनुकूल और सभी के लिए सुलभ हो। भविष्य में नई जटिलताएँ और चुनौतियाँ आएंगी। फिर भी, स्थिरता, नवाचार और समावेशिता के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ आरबीआई शक्तिशाली बना रहेगा - विश्वास को मजबूत बनाए रखेगा और भविष्य में भारत को समृद्धि और वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगा।
मौद्रिक और वित्तीय स्थिरता के संरक्षक के रूप में, आरबीआई इस यात्रा में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा तथा एक सुदृढ़ बैंकिंग प्रणाली सुनिश्चित करेगा, वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देगा और हमारे वित्तीय इकोसिस्टम में विश्वास को बनाए रखेगा।
मैं पुन: इस महत्वपूर्ण अवसर पर पूरे आरबीआई परिवार, भूतपूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई देती हूं, और आगे भी आरबीआई की निरंतर सफलता की कामना करती हूं।
धन्यवाद।
जय हिंद!
जय भारत!