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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के शताब्दी समारोह के अवसर पर सम्बोधन

इलाहाबाद : 29.06.2018
भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के शताब्दी

1.आपके एसोसिएशन के सौ वर्ष पूरे होने पर आप सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई! मुझे बताया गया है कि इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की स्थापना इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अस्तित्व में आने से दस वर्ष पहले ही हो गई थी। यह तथ्य इलाहाबाद शहर के बौद्धिक रूप से अग्रणी होने की परंपरा के अनेक उदाहरणों में से एक है।

2.त्रिवेणी संगम के तट पर बसे इलाहाबाद शहर में आकर मुझे विशेष प्रसन्नता होती है। इलाहाबाद का कुम्भ-मेला प्राचीन काल से ही आकर्षण और अध्ययन का विषय रहा है। दिसंबर 2017 में UNESCO ने कुम्भ-मेला को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। अब कुम्भ-मेला पूरे विश्व की सांस्कृतिक धरोहर बन गया है। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है।

3.साहित्य, विज्ञान, गणित, दर्शन, राजनीति और प्रशासन समेत सभी क्षेत्रों में इलाहाबाद शहर अनेक विभूतियों की जन्म-स्थली और कर्म-स्थली रहा है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े दो डॉक्टर पद्मश्री और तीन डॉक्टर बी. सी. रॉय अवार्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं।

4.मुझे बताया गया है कि सप्ताह भर चलने वाला एसोसिएशन का शताब्दी समारोह परसों डॉक्टर्स डे के दिन सम्पन्न होगा। इस संदर्भ में एक महान राष्ट्र-निर्माता डॉक्टर को याद करना बहुत प्रासंगिक है। डॉक्टर्स डे भारत में एक जुलाई को मनाये जाने का एक विशेष कारण है। डॉक्टर बी. सी. रॉय की जन्मतिथि और पुण्यतिथि दोनों ही एक जुलाई को पड़ती हैं। वेइंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य थे। उन्ही के सम्मान में भारत में डॉक्टर्स डे एक जुलाई को मनाया जाता है।

5.भारत-रत्न से अलंकृत डॉक्टर बी. सी. रॉय एक बहुत ही उत्कृष्ट और सफल डॉक्टर होने के साथ-साथ एक सक्रिय स्वतन्त्रता सेनानी भी थे। कहा जाता है कि डॉक्टरी पेशे के प्रति अपनी निष्ठा के कारण उन्होने पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया था। ऐसे उल्लेख पाये जाते हैं कि महात्मा गांधी के कहने पर उन्होने अपनी स्वीकृति दी और चौदह वर्षों तक वे मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते रहे। देश-विभाजन के बाद के उस बहुत कठिन दौर में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाते हुए भी वे निरंतर मरीजों की नि:शुल्क सेवा करते रहे। कहा जाता है कि अपने जीवन के अंतिम दिन भी उन्होने मरीजों को देखा था। उनके जीवन में, एक डॉक्टर की सेवा भावना का आदर्श देखने को मिलता है। इसीलिए डॉक्टर बी. सी. रॉय अवार्ड हमारे देश में डाक्टरों के लिए सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है।

6.हमारे देश में, अधिकांश लोग, डॉक्टरों को भगवान का दर्जा देते हैं। वे अपने और अपने प्रिय जनों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा आप सबको सौंपते हैं। इसलिए मेडिकल प्रोफेशन केवल एवोकेशन या जीविकोपार्जन का साधन नहीं है। यह एक नोबल प्रोफेशन है जिसमें मानवता के पक्ष को प्राथमिकता दी जाती है। डॉक्टरों के हितों का ध्यान रखने के साथ-साथ मरीजों के, विशेषकर गरीब तबके के मरीजों के हितों को, सर्वोपरि रखना आप सबका सामाजिक और नैतिक दायित्व है। मैं मानता हूँ कि किसी मरीज को फिर से स्वस्थ बनाकर और किसी मरीज की जान बचाकर जो संतोष एक डॉक्टर को मिलता है वह पैसों में नहीं आँका जा सकता है। मेरा मानना है कि संतोष और सार्थकता की दृष्टि से एक डॉक्टर का काम सबसे बढ़कर है।

7.हमारे देश में डॉक्टरों के परिश्रम और योगदान के बल पर अनेक पैमानों पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। एवरेज लाइफ एक्सपेक्टेंसी अब अड़सठ साल से अधिक हो गयी है, जो कि आजादी के समय केवल बत्तीस वर्ष थी; टीकाकरण के काम में बहुत प्रगति हुई है; अन्य बहुत से मानकों पर प्रभावशाली उपलब्धियां दर्ज की गयी हैं। लेकिन अभी भी बहुत सी चुनौतियों पर विजय पाना बाकी है। मैटरनल और इनफ़ैन्ट मॉर्टेलिटी में कमी लानी है; टी.बी., मलेरिया, हैजा जैसी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम करनी है; साथ ही डायबिटीज़ और हार्ट एलमेंट्स जैसे लाइफ स्टाइल डीजीजेज़ पर भी नियंत्रण करना है। इन प्रयासों में सरकार तथा अन्य स्टेक-होल्डर्स के साथ-साथ आप सब की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

8.भारतीय परंपरा में, सबके कल्याण के लिए कहा जाता है सर्वे संतु निरामयाः अर्थात सभी रोगमुक्त होवें। सबके रोगमुक्त होने के इस लक्ष्य को पाने के लिए ट्रीटमेंट के अलावा प्रिवेंटिव मेडिसिन पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रिवेन्शन इस बेटर दैन क्योर की नीति पर चलना बहुत लाभदायक है। प्रिवेन्शन के लिए, डॉक्टरों के साथ अन्य सभी स्टेक-होल्डर, जुटकर काम करेंगे, तो व्यक्ति, परिवार और देश,तीनों ही स्तरों पर, खर्च कम होगा तथा बेहतर स्वास्थ्य के अलावा अन्य बहुत से लाभ होंगे।

9.सभी नागरिकों को कम खर्च पर समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें, इसी उद्देश्य के साथ नेशनल हेल्थ मिशन’, नेशनल हेल्थ पॉलिसी और आयुष्मान भारत योजना के तहत अनेक कदम उठाए गए हैं, जन-औषधि केन्द्रों की स्थापना की गई है, तथा दवाओं और चिकित्सा के उपकरणों की कीमतों में कमी की गई है। परंतु अंततः, डॉक्टरों की कर्तव्य-परायणता ही जन-हित में प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं की धुरी है।

10.चिकित्सा के क्षेत्र में इन्फॉर्मेशन टेक्नालजी और डिजिटल सुविधाओं का व्यापक उपयोग करने से, स्वास्थ्य सेवाएँ और अधिक प्रभावी बनाई जा सकती हैं। आजकल टेली-मेडिसिन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। विश्व के अनेक देशों में ‘Big Data’ के इस्तेमाल से मरीजों को बेहतर उपचार देने की दिशा में काम हो रहा है। मैं आशा करता हूँ कि भारत में भी डॉक्टरों और technology experts द्वारा इस दिशा में और अधिक काम किया जाएगा।

11.इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टरों को हर साल माघ-मेला में आने वाले तीर्थ-यात्रियों की सेवा का अवसर मिलता है। अगले वर्ष आयोजित होने वाले कुंभ मेला पर पूरी दुनियाँ की निगाहें टिकी होंगी। यह आप सबके लिए अपनी सेवा भावना को व्यक्त करने का एक महान अवसर होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सदैव इलाहाबाद और भारत की मेडिकल फ्रेटरनिटी का नाम रौशन करते रहेंगे।

12.इस शताब्दी समारोह के लिए एक बार फिर आप सबको मेरी हार्दिक बधाई तथा आप सभी के सफल और सार्थक भविष्य की शुभकामनाएँ!

धन्यवाद

जय हिन्द!


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