• Skip to Main Content /
  • Screen Reader Access

Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का कानपुर बार एसोसिएशन के सभागार के शिलान्यास समारोह में सम्बोधन

कानपुर : 29.06.2018
भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का कानपुर बार एसोसिएशन के सभागार के शिल

1.कानपुरबार एसोसिएशनतथालॉयर्सएसोसिएशनसेजुड़े सभीअधिवक्ताओं कोसंबोधित करतेहुए मुझेबहुत प्रसन्नताका अनुभवहो रहाहै। अधिवक्ताओं को समर्पित सभागारके िर्माणका शिलान्यासकरके मुझेबहुत खुशीहुई है।

2.कानपुर का पूराक्षेत्र मेरेलिए काफी जाना-पहचानाहै। यहाँआकर बहुतसी यादेंताजा होजाती हैं।अपनी स्कूलऔर कॉलेजकी शिक्षामैंने कानपुरमें हीपूरी कीहै। कानपुरविश्वविद्यालय सेबी. कॉमऔर एलएलबीकी पढ़ाईकरके मैंनेदिल्ली बार काउंसिलकी सदस्यता ली और वकालत शुरू की। अधिवक्ता के दायित्वों के बोध ने,व्यक्तिगत, सामाजिकऔर सार्वजनिक जीवन में मेरा सदैव मार्गदर्शन किया है। पहले बिहार के राज्यपाल और अब राष्ट्रपति के रूप मेंसंविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने और भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहने के दायित्व को निभाने में मुझे अपने अधिवक्ता के रूप में प्राप्त ज्ञान और अनुभवों से बहुत सहायता मिलती है।

3.वकालत एक बहुत नोबल प्रोफेशन है। यह केवल एवोकेशन या जीविकोपार्जन का जरिया नहीं है। इस प्रोफेशन में लोगों को सहायता पहुंचाने तथा समाज के हित में योगदान को प्राथमिकता देने के अवसर मिलते हैं। प्रत्येक अधिवक्ता न्यायालय प्रणाली का एक आवश्यक अंग होता है। इसीलिए उसे Officer of the Courtभी कहा जाता है। इस व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो हर अधिवक्ता न्यायालय का मित्र है। यही नहीं, वह सम्पूर्ण न्याय-व्यवस्था का और पूरे समाज का भी मित्र है।

4.वकालत पेशे के व्यापक प्रभाव के कारण विश्व के अनेक प्रमुख देशों में, अधिवक्ताओं ने, अपने समाज और देश को नेतृत्व प्रदान किया है। भारत केआधुनिक इतिहासमें अधिवक्ताओंकी निर्णायकभूमिका रहीहै। आजादीकी लड़ाई,और समाजसुधार,आदि सभीक्षेत्रों मेंवकीलों नेमहत्वपूर्ण योगदानदिया है।कानपुर केरायबहादुरविक्रमाजीतसिंह अधिवक्ताओं कीउसी परंपरामें थे।उन्होंने वकालतके अलावाराजनीति, समाजऔर संस्कृतिके क्षेत्रमें भीयोगदान दिया था। उनके द्वारास्थापित किएगए ब्रह्मावर्तसनातनधर्ममहामंडलद्वारा बी.एन.एस.डी.कॉलेज कीस्थापना कीगई थी जहांका मैंविद्यार्थी रहाहूँ। इसीमहामंडल नेविक्रमाजीतसिंहसनातनधर्मकॉलेज कीस्थापना भी कीथी। इसी वर्षफरवरी मेंमैंने उसकॉलेज केपरिसर में स्थित विधि-भवनका लोकार्पणकिया थाजहां अधिवक्ताओंकी अगलीपीढ़ियाँ तैयारकी जाएंगी।

5.एक अधिवक्ताके रूपमें मैंनेगरीब लोगोंके न्याय-व्यवस्थासे जुड़ेसंघर्ष कोबहुत करीबसे देखाहै। ामान्यनागरिकों को न्यायपालिका पर बहुत भरोसाहोता है।फिर भीवे न्यायालय कीचौखट पर जाने से बचनाचाहते हैं। यहस्थिति बदलने की आवश्यकता है। यहबदलाव लानेकी ज़िम्मेदारीहम सबकीहै। हमेंऐसा बदलावलाना हैजिससे सभीको समयसे न्यायमिले, न्यायप्रक्रिया मेंहोने वालाखर्च कमहो, िर्णयकी भाषासामान्य आदमीकी समझमें आएऔर महिलाओंतथा कमजोरवर्ग केलोगों कोसुगमता सेन्याय मिले

6.गरीब न्याय-प्रार्थियोंके लिए,ंबा समय लेनेवाली न्याय-प्रक्रियाका बोझ,असहनीय होताहै। इसअन्याय कोदूर करनेके लिएएक उपायतो यहीहै किजहां तकसंभव हो सके, adjournmentके उपयोग से बचा जाए।Adjournment बात तभीहो जबऔर कोई अन्य विकल्प बचा हो।

7.एक अध्ययनके अनुसारनिचली अदालतोंसे लेकरउच्चतम न्यायालयतक पूरेदेश मेंतीन करोड़से भी अधिक मामले pending हैं। इनमेसे :लाख ऐसेमामले हैं,जो दससाल सेभी अधिकमय सेचल रहेहैं। अनेकराज्यों मेंनिचली अदालतोंमें लंबितमामलों कोनिबटाने केलक्ष्य तयकिये गएहैं। मुझेआशा हैकि उत्तरप्रदेश मेंभी नियतअवधि मेंऐसे लक्ष्यप्राप्त किएजाएंगे। ऐसेन्यायपरक लक्ष्योंको प्राप्तकरने में,राज्य कीसबसे बड़ीबार एसोसिएशन केसदस्यों केरूप मेंआप सबबहुत बड़ायोगदान देसकते हैं।

8.एक अधिवक्ताके रूपमें मेराअनुभव रहाहै किवैकल्पिक न्याय-प्रणालीको मजबूतबनाने सेसामान्य नागरिकोंको बहुतलाभ पहुंचताहै। मुझेप्रसन्नता हैकि लोकअदालतों औरमीडिएशन सेन्टर्सके जरियेमामलों कोसुलझाने मेंन्यायाधीशों और अधिवक्ताओं नेमिलकर उत्साह दिखायाहै। ऐसाकरने से,न्याय प्रक्रियामें लगने वाले समयऔर पैसे,दोनो कीबचत होतीहै। साथही लंबितमामलों कीसंख्या भीकम होतीहै।

9.सामान्य पृष्ठभूमि से वकालत के क्षेत्र में आने वाले युवाओं के लिए आरंभिक समय कठिन संघर्ष का होता है। ऐसे नवागंतुक अधिवक्ताओं की सहायता के लिए एसोसिएशन द्वारा क्या किया जा सकता है इस दिशा में आप सभी सोच सकते हैं और आवश्यक कदम उठा सकते हैं।

10.न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच अच्छे तालमेल सेजस्टिस डेलीवरी बेहतर होती है। इस संदर्भ में बार एसोसिएशन की मुख्य भूमिका है। मुझे विश्वास है कि यहाँ के अधिवक्ताओं की दोनों एसोसिएशन्स के द्वारा हमारी न्याय-व्यवस्था के इस पक्ष को निरंतर मजबूत बनाया जाएगा।

11.पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिला न्यायालयों में अधिवक्ताओं द्वारा हड़ताल करने और न्याय प्रक्रिया से विरत होने की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसी घटनाएँ न्याय-प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती हैं। सभी बार एसोसिएशन्स का यह प्रयास होना चाहिए कि यथासंभव ऐसी बाधाओं से मुक्ति मिले।

12.किसी भी अन्यक्षेत्र कीतरह, न्यायपालिकाकी कार्यक्षमता कोबढ़ाने मेंभी, digital और physical infrastructureको मजबूतबनाने सेसहायता मिलतीहै। केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गयाLIMBS अर्थात ‘Legal Information Management and Briefing System’ डिजिटल प्लैटफ़ार्म के उपयोग का एक अच्छा उदाहरण है। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा प्रदेश मेंe-courts की स्थापना की गई है। जिला न्यायालयोंमेंInformation और Communication Technologyके उपयोगके द्वारान्याय प्रक्रियासे जुड़ेसभी पक्षोंको सुविधाहोगी।

13.इसी प्रकार physical infrastructureमें सुधार से भी न्याय-प्रक्रिया से जुड़े लोगों की कार्य-क्षमता में वृद्धि होती है।बार एसोसिएशनकी सुविधाओं में सुधार होने से अधिवक्ताओंका working atmosphere बेहतरहोता है।यह कहा जासकता हैकि हमारीन्याय व्यवस्थाको औरअधिक प्रभावीबनाने कादारोमदार सबसेअधिक आपसभी अधिवक्ताओंपर हीहै। अतः आपके लिए अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराना बार एसोसिएशन का एक प्रमुख कर्तव्य है।

14.मुझे पूरा विश्वासहै किइस नए सभागारके निर्माणसे आप सभी अधिवक्ताओं को सहूलियत होगी और सभी वादकारियों,खासकर आर्थिकएवं सामाजिक रूप सेकमज़ोर वादकारियोंएवं महिलाओं के हितको आप सब महत्व देंगे।

15.आप सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ !

धन्यवाद

जय हिन्द!

Go to Navigation