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अभिभाषण

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्‍द का साइप्रस में भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित समारोह में संबोधन

निकोसिया : 02.09.2018
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भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्‍द का साइप्रस में भारतीय समुदाय द्वारा आय

1. यहां साइप्रस आकर और आप सभी लोगों से मुलाकात करके मुझे बहुत खुशी हुई है। इतनी गर्मजोशी और प्रेम से मेरा स्वागत करने के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूं। आप लोग यहां मौजूद हैंइससे यह पता चलता है कि आप भारत से बाहर रहकर भी अतिथि देवो भव’ की परंपरा निभा रहे हैं। कहा जाता है कि हम दुनिया में जहां भी जाते हैंप्यार और सौहार्द साथ लेकर चलते हैं।

2. मैं, अभी तक जिन देशों की यात्रा पर गया हूंउनमें रह रहे भारतीय समुदाय से मैं हमेशा मुलाकात करता हूं। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपलोगों से मिलकर कुछ विशेष भाव मेरे मन में आते हैं। ऐसे भाव दिल में तभी आते हैंजब कोई अपने प्रियजनों से,अपने परिवार से और अपने मित्रों से मिलता है। यह बताने की जरूरत नहीं है कि कुछ ऐसा ही उल्लास मुझे इस समय महसूस हो रहा है।

3. मेरे साथ, मेरे शिष्टमंडल में कृषि और किसान कल्याण तथा पंचायती राज मंत्रालय में राज्य मंत्रीश्री पुरुषोत्तम रूपाला आए हैं;वे गुजरात से हैं। इसके अलावा मेरे साथ दो विशिष्ट सांसद भी आए हैंजिनमें से एक श्री सुनील कुमार सिंहझारखंड से हैं और दूसरे श्री राम शकलउत्तर प्रदेश से हैं।

4. इस खूबसूरत देश के साथ हमारे बेहद नजदीकी रिश्ते रहे हैं। भारत और साइप्रस ने एक दूसरे के स्वाधीनता आंदोलनों में परस्पर समर्थन दिया था और आजादी प्राप्त करने के बादएक राष्ट्र के रूप में प्रगति करने में एक-दूसरे की सहायता की है। साइप्रस की संस्कृति भी भारत की तरह ही प्राचीन संस्कृति है। विविधता और बहु-संस्कृति के बारे में इस देश की समझ बहुत गहरी है। उनका आचार-विचार भी हमारे जैसा ही है। शायद इसी कारण सेभारत और साइप्रस एक-दूसरे को सहज मित्र मानते हैं। इस देश में महात्मा गांधी और अन्य भारतीय नेताओं के प्रति बहुत सम्मान है। इसी प्रकारसाइप्रस के प्रथम राष्ट्रपति,आर्चबिशप मकारिओस की हम बहुत इज्ज़त करते हैं। हमने दिल्ली में एक सड़क का नामकरणउन्हीं के नाम पर किया है।

5. साइप्रस ने हमारे राष्ट्रपिता को इस शहर में गरिमामय स्थान दिया हैउनकी प्रतिमा संसद भवन के साथ में स्थापित है। कल मैं उनके प्रति आदर व्यक्त करने वहां जाऊंगा। 1970 में यहां बापू की जन्म-शताब्दी मनाई गई थी और उस अवसर पर एक डाक टिकट जारी किया गया था। साइप्रस-वासियों के मन में महात्मा गांधी के प्रति जो सम्मान का भाव हैयह उसी की अभिव्यक्ति है। अब से ठीक एक महीने बाद, 2 अक्‍तूबर से, दुनिया भर में गांधी जी की 150 वीं जयंती से जुड़े समारोह शुरू हो जाएंगे। मुझे आशा है कि इन समारोहों में साइप्रस की सहभागिता भी रहेगी। मेरा आग्रह है कि महात्मा गांधी के संदेश और उनकी सोच को दूर-दूर तक ले जाने में आप भी हमारी सहायता करें।

6. यहां मौजूद बहुत से लोगों को यह मालूम होगा कि U.N. Peacekeeping मिशन के अंतर्गतइस देश मेंशांति और सद्भाव बनाए रखने मेंभारतीय सेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत के महान सपूतजनरल के.एस. थिमैया ने 1965में यहीं पर सेवा के दौरान अपने प्राण त्यागे थे। हम साइप्रस की जनता और यहां की सरकार की सराहना करते हैं कि उन्होंने लरनका से निकोसिया तक की सड़क का नामकरण उनके नाम पर किया है।

7. भारत से किसी राष्ट्रपति की साइप्रस यात्रा नौ वर्ष बाद हो रही है। इससे पहले 2009 में राष्ट्रपति,श्रीमती प्रतिभा पाटिल साइप्रस आईं थीं। उनसे भी पहलेहमारे पूर्व प्रधानमंत्री,श्री अटल बिहारी वाजपेयी 2002 में साइप्रस आए थे। आप जानते ही हैं कि अभी पिछले महीने ही उनका स्वर्गवास हुआ है। सर्वप्रिय राजनेता और प्रधानमंत्री के तौर पर राष्ट्र निर्माण और भारतीय राजनीति में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

8. कल मेरी राष्ट्रपति अनास तासियादेस के साथ मुलाकात होगी। हम लोग भारत और साइप्रस के बीच के संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे। मुझे साइप्रस की संसद के एक असाधारण अधिवेशन को संबोधित करने का भी अवसर प्राप्त हो रहा है। मुझे बताया गया है कि साइप्रस में भारतीय Students काफी बड़ी संख्या में हैं। दोनों देशों के युवाओं के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाने के लिए मैं साइप्रस UniversityमेंStudents को संबोधित करूंगा और इस अवसर परगुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की प्रतिमा का अनावरण भी करूंगा।

9. आज जो लोग यहां उपस्थित हैं, उनमें professionals, students और entrepreneurs - सभी शामिल हैं। आप लोग भारत के अलग-अलग हिस्सों से - कोई पंजाब सेकोई उत्तर प्रदेश से और कोई दक्षिण भारत से आया होगा। लेकिन हमारे बीच में जो एकता का सूत्र हैवह हम सब को एकजुट रखता है। और यह सूत्र है- हमारी साझी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का। इसे लेकर, आपमें से कुछ लोग इस देश में कई वर्ष पहले आए होंगेजबकि अन्‍य लोग अभी कुछ साल पहले ही आए होंगे। इस बीच, भारत ने बहुत कुछ हासिल किया है। इस बार जब आप भारत आएंगे तो भारत को बहुत बदला हुआ पाएंगे। आइए, इस नवीन भारत से जुड़ें।

10. मुझे बहुत खुशी है कि भारतीय समुदाय, यहां शांतिप्रेमी समुदाय के रूप में सम्मानित है। आप लोग स्थानीय समाज में अच्छी तरह घुल मिल गए हैं। इसके साथ ही आप साइप्रस के सामाजिक-आर्थिक विकास में तथा साइप्रस की तरक्की में अपना योगदान भी कर रहे हैं। आपके इस योगदान की सराहना साइप्रस की सरकार और यहां की जनता में साफ तौर पर देखी जा सकती है। अपने कठिन परिश्रम और Dedication से आपने हमें भी गौरव प्रदान किया है।

11. हम भारतीय, इस मायने में भाग्यशाली हैंकि हम जहां भी जाते हैंवहां के लोगों के साथ साझा करने के लिएहमारे पास बहुत कुछ होता है। मुझे खुशी है कि आपने इस देश में, अपनी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखा है। मुझे बताया गया कि आप यहांपूरे उल्लास और उत्साह के साथ बैसाखी,होलीदीवाली,ईद और अन्य भारतीय त्योहार मनाते हैं।

12. भारत अब विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और fastest growing major economy बन चुका है। पिछलेquarter में हमने8.2% की growth rate प्राप्त की है।4 वर्षों की अवधि में ही,हमने 18,000से अधिक गांवों में बिजली पहुंचा कर, देश के हर गांव का विद्युतिकरण कर दिया है।मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्ट अप इंडिया’ और डिजिटल इंडियासहित सरकार के प्रमुख कार्यक्रमतेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अपने उज्ज्वला’ कार्यक्रम के जरिए हमने, 5 करोड़ परिवारों को खाना बनाने के लिए स्वच्छ गैस,उपलब्ध करवा दी है। आज भारत में एक नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आपभारत में अवसरों की तलाश करें और अपने-अपने तरीके से राष्ट्र-निर्माण में योगदान दें।

13. भारत की अपनी तरक्की में देश का नया आत्मविश्वास झलकता है। हमने अपने International relations में उल्लेखनीय विस्तार किया है। युगों-युगों से हम, ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ में विश्वास करते आ रहे हैं और विश्व भर को अपना परिवार मानते आए हैं। इसीलिएहमने विषम परिस्थितियों याnatural disasters में फंसेकेवल अपने लोगों को ही नहीं बचाया है,बल्किअन्य जरूरतमंद लोगों तक भी मदद का हाथ बढ़ाया है। पिछले 4 वर्षों में हम,विदेशों में मुसीबत में फंसे90,000 से ज्यादा नागरिकों को,सुरक्षित बाहर लाने में सफल हुए हैं। इनमें 50 से अधिक देशों के नागरिक भी शामिल हैं।

14. पिछले कुछ वर्षों में, आपने महसूस किया होगा कि अपने प्रवासी भारतीय समुदाय से जुड़नेऔर उस तक अपनी पहुंच बढ़ाने के,हमारी सरकार के तौर-तरीकों मेंएक बड़ा बदलाव आया है। भारत और विदेश में बसे भारतीयों के बीच emotionally, culturally, economicallyऔर institutionally हमारे संबंध,इन वर्षों में ज्यादा गहरे हुए हैं। हमने ओ.सी.आई. योजना को सरल बनाया हैताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ ले सकें। हमने अपने High Commissions औरEmbassiesको निर्देश दिया हैकि वे जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए,चौबीसों घंटे उपलब्ध रहें। मुझे बताया गया है कि यह व्यवस्था अच्छे ढंग से काम कर रही है।

15. हम यह मानते हैं कि, अपनी अंतरराष्ट्रीय पहुंच को मजबूत बनाने में प्रवासी भारतीय समुदायहमारा महत्वपूर्ण साझीदार है।आप में से हर एक भारतीय की भूमिकाभारत के संदेश को फैलाने में महत्वपूर्ण है। यह सच है कि भारत सरकार ने यहां Senior Diplomat डॉ. राघवन कोHigh Commissioner नियुक्‍त किया है,लेकिन आप में से हर भारतीय कोहम अपना Cultural Ambassador मानते हैं। हमें भरोसा है कि आपसाइप्रस के साथ भारत के रिश्तों को और भी घनिष्ठ बनाएंगे।

16. आज मुझे आप लोगों से मुलाकात का सुअवसर मिला है। इस अवसर पर मैं आपको निमंत्रित करता हूं कि आप लोग जब भी भारत आएं, दिल्‍ली में राष्‍ट्रपति भवन में जरूर आएं। यह भवन सभी भारतीयों का है, आप सबका है। एक बार फिर मैं आप सबको धन्यवाद देता हूं कि आप लोग यहां आए और इतनी गर्मजोशी तथा स्नेह के साथ मेरा स्वागत किया।

धन्यवाद

जय हिन्द।

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