भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

राष्ट्रपति मुर्मु ने आईएएस अधिकारियों से कहा : करुणा पर आधारित तर्कपूर्ण सोच के साथ कार्य करें; संवेदनशील बनें किंतु भावुक नहीं।

राष्ट्रपति भवन : 20.05.2026

वर्ष 2024 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के समूह ने आज 20 मई, 2026 को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। ये सभी अधिकारी फिलहाल विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं।

आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, विशेष रूप से आईएएस अधिकारियों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जबकि देश विकास के ऊंचे सोपान पर पहुंच गया है, तो ऐसे में अधिकारियों से अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध क्षेत्रों में काम करने का अनूठा अवसर मिलेगा। बहुत से अवसरों पर वे कतिपय विशेषीकृत क्षेत्रों में विशेषज्ञों की टीमों का नेतृत्व करेंगे। इसलिए, उनके सीखते रहने का दायरा और रफ्तार अत्यन्त व्यापक और तीव्र होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनमें विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों के प्रति अपने आपको ढालने की असाधारण क्षमता होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों की तटस्थता उनकी निष्पक्षता का सूचक होगी। उनकी संवेदनशीलता, समावेशिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मापदंड होगी। पारदर्शिता और निरंतर अच्छे कार्य-निष्पादन से उनकी विश्वसनीयता बढ़ेगी। उनकी सत्यनिष्ठा, जो व्यक्तिगत और पेशेवर आचरण से अभिव्यक्त होती है, से उन्हें लोक हित में निर्णायक कार्रवाई करने का नैतिक बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को करुणा पर आधारित तर्कपूर्ण सोच के साथ कार्य करना है। उन्हें संवेदनशील होना है किंतु भावुक नहीं। उन्हें नियमों का पालन करना है किंतु वृहत्तर उद्देश्यों से नजरें नहीं हटानी हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आचार-नीति और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को ईमानदार और नीतिसम्मत होना है। साथ ही, उन्हें ठोस परिणाम भी देने हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है। लोक हित और सुस्थापित परम्परा के अनुरूप सही निर्णय लेने से नैतिकता की सही भावना अभिव्यक्त होती है। जैसे कि न्याय मिलने में देरी होने को न्याय से इनकार करना माना जाता है वैसे ही प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में विलंब करना लोगों को उनके विधिमान्य हितों से वंचित करने के सदृश हुआ।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतन्त्र का उद्देश्य अपने लोगों की आकांक्षाओं को साकार करना है। ये आकांक्षाएं निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त होती हैं। इसलिए, यह अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे इन जनप्रतिनिधियों द्वारा लोक हित में उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि बहती धारा के साथ बहते रहने में कोई प्रयास नहीं करना पड़ता। विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए और हमारे समाज को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने के लिए आप सब को कई बार धारा के विपरीत संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे फील्ड में हों या कार्यालय में उन्हें भारत के लोगों को, विशेषकर वंचित वर्गों के लोगों को अपने विचारों और कार्यों के केंद्र में रखना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।

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